Sad Poetry (page 351)

इस तरह रुख़ फेरते हो सुनते ही बोसे की बात

अब्दुल वहाब यकरू

गुदाज़-ए-आतिश-ए-ग़म सीं हुई हैं बावली अँखियाँ

अब्दुल वहाब यकरू

गल को शर्मिंदा कर ऐ शोख़ गुलिस्तान में आ

अब्दुल वहाब यकरू

अगर वो गुल-बदन दरिया नहाने बे-हिजाब आवे

अब्दुल वहाब यकरू

अगर नहीं क़स्द ऐ ज़ालिम मिरे दिल के सताने का

अब्दुल वहाब यकरू

नई ग़ज़ल का नई फ़िक्र-ओ-आगही का वरक़

अब्दुल वहाब सुख़न

नए हैं वस्ल के मौसम मोहब्बतें भी नई

अब्दुल वहाब सुख़न

मुझे एहसास ये पल पल रहा है

अब्दुल वहाब सुख़न

महक रहा है तसव्वुर में ख़्वाब की सूरत

अब्दुल वहाब सुख़न

ऐ मेरी आँखो ये बे-सूद जुस्तुजू कैसी

अब्दुल वहाब सुख़न

दिल की हालत बयाँ नहीं होती

अब्दुल सलाम

आग सीनों में जला कर रखिए

अब्दुल सलाम

मोहब्बत का जिसे इरफ़ाँ नहीं है

अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची

क्या क्या सुपुर्द-ए-ख़ाक हुए नामवर तमाम

अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची

कोई नज़्र-ए-ग़म-ए-हालात न होने पाए

अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची

करते नहीं जफ़ा भी वो तर्क-ए-वफ़ा के साथ

अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची

जीत कर बाज़ी-ए-उल्फ़त को भी हारा जाए

अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची

ग़म से घबरा के कभी नाला-ओ-फ़रियाद न कर

अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची

दिल उन की मोहब्बत का जो दीवाना लगे है

अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची

याद तो हक़ की तुझे याद है पर याद रहे

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

उल्फ़त में तेरा रोना 'एहसाँ' बहुत बजा है

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

किस को उस का ग़म हो जिस दम ग़म से वो ज़ारी करे

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

गले से लगते ही जितने गिले थे भूल गए

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

गले से लगते ही जितने गिले थे भूल गए

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

एक बोसे से मुराद-ए-दिल-ए-नाशाद तो दो

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

चश्म-ए-मस्त उस की याद आने लगी

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

ज़ात उस की कोई अजब शय है

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

फिर आया जाम-ब-कफ़ गुल-एज़ार ऐ वाइज़

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

नीम-चा जल्द म्याँ ही न मियाँ कीजिएगा

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

नहीं सुनता नहीं आता नहीं बस मेरा चलता है

अब्दुल रहमान एहसान देहलवी