Sad Poetry (page 349)

अभी तो आप ही हाइल है रास्ता शब का

अभिषेक शुक्ला

राह भटका हुआ इंसान नज़र आता है

अभिषेक कुमार अम्बर

सितारों से आगे जहाँ और भी हैं

अबीर अबुज़री

उसे खिलौनों से बढ़ कर है फ़िक्र रोटी की

अब्दुस्समद ’तपिश’

उन के लब पर मिरा गिला ही सही

अब्दुस्समद ’तपिश’

मैं भी तन्हा इस तरफ़ हूँ वो भी तन्हा उस तरफ़

अब्दुस्समद ’तपिश’

पत्ते पत्ते से नग़्मा-सरा कौन है

अब्दुस्समद ’तपिश’

ख़ौफ़-ओ-वहशत बर-सर-ए-बाज़ार रख जाता है कौन

अब्दुस्समद ’तपिश’

गरचे नेज़ों पे सर है

अब्दुस्समद ’तपिश’

एक भी चैन का बिस्तर नहीं होने देता

अब्दुस्समद ’तपिश’

देख कर मेरी अना किस दर्जा हैरानी में है

अब्दुस्समद ’तपिश’

ये कौन मेरे अलावा मिरे वजूद में है

अब्दुर्राहमान वासिफ़

मेज़ क़लम क़िर्तास दरीचा सन्नाटा

अब्दुर्राहमान वासिफ़

मज़ीद कुछ नहीं बोला मैं हो गया ख़ामोश

अब्दुर्राहमान वासिफ़

जहान-ए-फ़िक्र पे चमकेगा जब सितारा मिरा

अब्दुर्राहमान वासिफ़

गुमान तोड़ चुका मैं मगर नहीं कोई है

अब्दुर्राहमान वासिफ़

फ़रेब-ए-ज़ार मोहब्बत-नगर खुला हुआ है

अब्दुर्राहमान वासिफ़

अगर तुम रोक दो इज़हार-ए-लाचारी करूँगा

अब्दुर्राहमान वासिफ़

कुछ न किया अरबाब-ए-जुनूँ ने फिर भी इतना काम किया

अब्दुर रऊफ़ उरूज

जादा-ए-मय पे गुज़र ख़्वाबों का

अब्दुर रऊफ़ उरूज

आज यादों ने अजब रंग बिखेरे दिल में

अब्दुर रऊफ़ उरूज

चुप

अब्दुर्रशीद

अपनी ही ज़ात के सहरा में सुलगते हुए लोग

अब्दुर्रहीम नश्तर

आवाज़ दे रहा है अकेला ख़ुदा मुझे

अब्दुर्रहीम नश्तर

वो शख़्स जिस ने ख़ुद अपना लहू पिया होगा

अब्दुर्रहीम नश्तर

फिर इक नए सफ़र पे चला हूँ मकान से

अब्दुर्रहीम नश्तर

पंछियों के रू-ब-रू क्या ज़िक्र-ए-नादारी करूँ

अब्दुर्रहीम नश्तर

इन काली सड़कों प अक्सर ध्यान आया

अब्दुर्रहीम नश्तर

दश्त-ए-अफ़्कार में सूखे हुए फूलों से मिले

अब्दुर्रहीम नश्तर

अगर हो ख़ौफ़-ज़दा ताक़त-ए-बयाँ कैसी

अब्दुर्रहीम नश्तर