Sad Poetry (page 350)
पड़े हैं मस्त भी साक़ी अयाग़ के नज़दीक
अब्दुल्ल्ला ख़ाँ महर लखनवी
पाबंद हर जफ़ा पे तुम्हारी वफ़ा के हैं
अब्दुल्ल्ला ख़ाँ महर लखनवी
न पहुँचे छूट कर कुंज-ए-क़फ़स से हम नशेमन तक
अब्दुल्ल्ला ख़ाँ महर लखनवी
मिज़्गाँ ने रोका आँखों में दम इंतिज़ार से
अब्दुल्ल्ला ख़ाँ महर लखनवी
रूठे हैं हम से दोस्त हमारे कहाँ कहाँ
अब्दुल्लतीफ़ शौक़
लग़्ज़िश-ए-साक़ी-ए-मय-ख़ाना ख़ुदा ख़ैर करे
अब्दुल्लतीफ़ शौक़
का'बा है कभी तो कभी बुत-ख़ाना बना है
अब्दुल्लतीफ़ शौक़
दिल दिया वहशत लिया और ख़ुद को रुस्वा कर लिया
अब्दुल्लतीफ़ शौक़
तुम तो ऐ ख़ुशबू हवाओ उस से मिल कर आ गईं
अब्दुल्लाह कमाल
वो शख़्स क्या है मिरे वास्ते सुनाएँ उसे
अब्दुल्लाह कमाल
वादा-ए-वस्ल है लज़्ज़त-ए-इंतिज़ार उठा
अब्दुल्लाह कमाल
उस की जाम-ए-जम आँखें शीशा-ए-बदन मेरा
अब्दुल्लाह कमाल
इतना यक़ीन रख कि गुमाँ बाक़ी रहे
अब्दुल्लाह कमाल
हसीन ख़्वाब न दे अब यक़ीन-ए-सादा दे
अब्दुल्लाह कमाल
अपने होने का इक इक पल तजरबा करते रहे
अब्दुल्लाह कमाल
अभी गुनाह का मौसम है आ शबाब में आ
अब्दुल्लाह कमाल
इस ही बुनियाद पर क्यूँ न मिल जाएँ हम
अब्दुल्लाह जावेद
याद यूँ होश गँवा बैठी है
अब्दुल्लाह जावेद
रूह को क़ालिब के अंदर जानना मुश्किल हुआ
अब्दुल्लाह जावेद
नंगे पाँव की आहट थी या नर्म हवा का झोंका था
अब्दुल्लाह जावेद
लगे है आसमाँ जैसा नहीं है
अब्दुल्लाह जावेद
कोई रिश्ता न हो फिर भी रिश्ते बहुत
अब्दुल्लाह जावेद
जो गुज़रता है गुज़र जाए जी
अब्दुल्लाह जावेद
चाँदनी रात में हर दर्द सँवर जाता है
अब्दुल्लाह जावेद
चाँदनी का रक़्स दरिया पर नहीं देखा गया
अब्दुल्लाह जावेद
चमका जो चाँद रात का चेहरा निखर गया
अब्दुल्लाह जावेद
मिरा दिल मुब्तला है झाँवली का
अब्दुल वहाब यकरू
मस्त अँखियाँ का देख दुम्बाला
अब्दुल वहाब यकरू
ख़ुश-क़दाँ जब ख़िराम करते हैं
अब्दुल वहाब यकरू
कब करे क़स्द यार आवन का
अब्दुल वहाब यकरू