Sad Poetry (page 59)
तुम्हारे लब पे थी मैं भी
हमीदा शाहीन
तुलूअ' से पहले
हमीदा शाहीन
साहिर
हमीदा शाहीन
रात
हमीदा शाहीन
प्यास दायरा बनाती है
हमीदा शाहीन
परदेसी
हमीदा शाहीन
न जाने कब लिखा जाए
हमीदा शाहीन
मुझे विर्सा नहीं मिला
हमीदा शाहीन
लुग़त महदूद है
हमीदा शाहीन
चोरी की भूक
हमीदा शाहीन
मलाल ज़र्द-क़बाई को धो रहा होगा
हमीदा शाहीन
इक जादूगर है आँखों की बस्ती में
हमीदा शाहीन
घूम रहे हैं आँगन आँगन चाँद हवा और मैं
हामिद यज़दानी
कितने ग़म हैं जो सर-ए-शाम सुलग उठते हैं
हामिद सरोश
शहर-ए-तरब में आज अजब हादिसा हुआ
हामिद सरोश
साँस लेने के लिए ताज़ा हवा भेजी है
हामिद सरोश
रात काटी है जाग कर बाबा
हामिद सरोश
बे-वजह भी देखा है परेशाँ तुम्हें 'हामिद'
हामिद सलीम
सूरज सा भी तारा हो ज़मीं सी भी ज़मीं हो
हामिद सलीम
मुझ से ये प्यास का सहरा नहीं देखा जाता
हामिद मुख़्तार हामिद
मक़ाम-ए-ज़ब्त ग़म-ए-इश्क़ में वो पैदा कर
हामिद मुख़्तार हामिद
मुझ से ये प्यास का सहरा नहीं देखा जाता
हामिद मुख़्तार हामिद
मआल-ए-दिल के लिए आज यूँ ख़ुदी तरसे
हामिद मुख़्तार हामिद
चाहे कुछ हो ज़ेर-ए-एहसाँ अपनी नादारी न रख
हामिद मुख़्तार हामिद
अपनी तक़दीर का शिकवा नहीं लिख्खा मैं ने
हामिद मुख़्तार हामिद
ये अब के कैसी मुश्किल हो गई है
हामिद कशमीरी
क़बा-ए-गर्द हूँ आता है ये ख़याल मुझे
हामिद जीलानी
भूल जा मत रह किसी की याद में खोया हुआ
हामिद जीलानी
अपने हिसार-ए-जिस्म से बाहर भी देखते
हामिद जीलानी
कोई नहीं था हुनर-आश्ना तुम्हारे बा'द
हामिद इक़बाल सिद्दीक़ी