Sad Poetry (page 60)

जुदाइयों के तसव्वुर ही से रुलाऊँ उसे

हामिद इक़बाल सिद्दीक़ी

सहरा में हर तरफ़ है वही शोर-ए-अल-अतश

हामिद हुसैन हामिद

जब्र बे-चारगी के मारों में

हामिद हुसैन हामिद

हमीं हैं दर-हक़ीक़त अपने क़ारी

हामिद हुसैन हामिद

सुब्ह भी अपनी शाम भी अपनी

हामिद इलाहाबादी

जज़्बात तेज़-रौ हैं कि चश्मे उबल पड़े

हामिद इलाहाबादी

हर वफ़ा ना-आश्ना से भी वफ़ा करना पड़ी

हामिद इलाहाबादी

फ़रेब दे न कहीं अज़्म-ए-मुस्तक़िल मेरा

हामिद इलाहाबादी

न याद की चुभन कोई न कोई लौ मलाल की

हमीद नसीम

देखते देखते तेरा चेहरा और इक चेहरा बन जाता है

हमीद नसीम

तरब से हो आया हूँ और यास की तह तक डूब चुका हूँ

हमीद नसीम

सुब्ह चले तो ज़ौक़-ए-तलब था अर्श-निशाँ ख़ुर्शीद-शिकार

हमीद नसीम

सवाल दिल का शाम-ए-ग़म को और उदास कर गया

हमीद नसीम

है यक दो नफ़स सैर-ए-जहान-ए-गुज़राँ और

हमीद नसीम

बे-कराँ दरिया हूँ ग़म का और तुग़्यानी में हूँ

हमीद नसीम

अब मिरा दर्द न तेरा जादू

हमीद नसीम

तिरे करम से तिरी बे-रुख़ी से क्या लेना

हमीद नागपुरी

तबस्सुम में न ढल जाता गुदाज़ ग़म तो क्या करते

हमीद नागपुरी

क़ुबूल कर के तेरा ग़म ख़ुशी ख़ुशी मैं ने

हमीद नागपुरी

मुझे रहीन-ए-ग़म-ए-जाँ-नवाज़ रहने दे

हमीद नागपुरी

ख़ुद अपने जज़्ब-ए-मोहब्बत की इंतिहा हूँ मैं

हमीद नागपुरी

ख़ुद अपने आप से हम बे-ख़बर से गुज़रे हैं

हमीद नागपुरी

हर ज़र्रा चश्म-ए-शौक़-ए-सर-ए-रहगुज़र है आज

हमीद नागपुरी

फ़िक्र पाबंदी-ए-हालात से आगे न बढ़ी

हमीद नागपुरी

छोड़िए छोड़िए ये बातें तो अफ़्साने हैं

हमीद जाज़िब

फिर गई इक और ही दुनिया नज़र के सामने

हमीद जालंधरी

भूली नहीं उजड़े हुए गुलशन की बहारें

हमीद जालंधरी

किस वहम में असीर तिरे मुब्तला हुए

हमीद जालंधरी

कल शाम लब-ए-बाम जो वो जल्वा-नुमा था

हमीद जालंधरी

कभी अपनों की यूरिश थी कभी ग़ैरों का रेला था

हमीद जालंधरी