Sad Poetry (page 57)
आइए आसमाँ की ओर चलें
हनीफ़ तरीन
ये फ़ज़ा-ए-नील-गूँ ये बाल-ओ-पर काफ़ी नहीं
हनीफ़ फ़ौक़
रात के दर पे ये दस्तक ये मुसलसल दस्तक
हनीफ़ फ़ौक़
नसीम-ए-सुब्ह-ए-बहार आए दिल-ए-हज़ीं को क़रार आए
हनीफ़ फ़ौक़
मिरी हयात अगर मुज़्दा-ए-सहर भी नहीं
हनीफ़ फ़ौक़
क्या नज़र की हुश्यारी ख़ुद-असीर-ए-मस्ती है
हनीफ़ फ़ौक़
जिस्म-ओ-जाँ किस ग़म का गहवारा बने
हनीफ़ फ़ौक़
फ़ज़ाओं में कुछ ऐसी खलबली थी
हनीफ़ फ़ौक़
दिल-ए-नादाँ पे शिकायत का गुमाँ क्या होगा
हनीफ़ फ़ौक़
चश्म-ए-पुर-नम अभी मरहून-ए-असर हो न सकी
हनीफ़ फ़ौक़
आह-ओ-फ़रियाद से मा'मूर चमन है कि जो था
हनीफ़ फ़ौक़
जो इस ज़मीं से कभी फिर नुमू करूँगा मैं
हनीफ़ नज्मी
अपने काँधों पे लिए फिरता हूँ अपनी ही सलीब
हनीफ़ कैफ़ी
थे मिरे ज़ख़्मों के आईने तमाम
हनीफ़ कैफ़ी
तमाम आलम से मोड़ कर मुँह मैं अपने अंदर समा गया हूँ
हनीफ़ कैफ़ी
की नज़र मैं ने जब एहसास के आईने में
हनीफ़ कैफ़ी
है राह-रौ के हुए हादसात की दीवार
हनीफ़ कैफ़ी
मैं जो अपने हाल से कट गया तो कई ज़मानों में बट गया
हनीफ़ असअदी
याद-ए-फ़रोग़-ए-दस्त-ए-हिनाई न पूछिए
हनीफ़ अख़गर
शदीद तुंद हवाएँ हैं क्या किया जाए
हनीफ़ अख़गर
किसी के जौर-ए-मुसलसल का फ़ैज़ है 'अख़्गर'
हनीफ़ अख़गर
ख़ल्वत-ए-जाँ में तिरा दर्द बसाना चाहे
हनीफ़ अख़गर
जो है ताज़गी मिरी ज़ात में वही ज़िक्र-ओ-फ़िक्र-ए-चमन में है
हनीफ़ अख़गर
जब भी उस ज़ुल्फ़-ए-परेशाँ की हवा आती है
हनीफ़ अख़गर
बज़्म को रंग-ए-सुख़न मैं ने दिया है 'अख़्गर'
हनीफ़ अख़गर
यादों का शहर-ए-दिल में चराग़ाँ नहीं रहा
हनीफ़ अख़गर
वो मुझे सोज़-ए-तमन्ना की तपिश समझा गया
हनीफ़ अख़गर
वो दिल में और क़रीब-ए-रग-ए-गुलू भी मिले
हनीफ़ अख़गर
तोड़ कर जोड़ दिया करते हो क्या करते हो
हनीफ़ अख़गर
शिकस्ता दिल किसी का हो हम अपना दिल समझते हैं
हनीफ़ अख़गर