गुल-बदन गुल-एज़ार आ जाओ

गुल-बदन गुल-एज़ार आ जाओ

जा रही है बहार आ जाओ

है अगर मुझ से प्यार आ जाओ

है फ़ज़ा साज़-गार आ जाओ

दीदा-ओ-दिल हैं फ़र्श-ए-राह मिरे

हमा-तन इंतिज़ार आ जाओ

छूट जाए कहीं न दामन-ए-सब्र

न करो बे-क़रार आ जाओ

आ के चाहो तो फिर चले जाना

ब-ख़ुदा एक बार आ जाओ

जैसे पहले मिला था मैं तुम से

तुम भी दीवाना-वार आ जाओ

तुम सताओगे कितना बर्क़ी को

हो अगर ग़म-गुसार आ जाओ

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Gul-badan Gul-ezar Aa Jao In Hindi By Famous Poet Ahmad Ali Barqi Azmi. Gul-badan Gul-ezar Aa Jao is written by Ahmad Ali Barqi Azmi. Complete Poem Gul-badan Gul-ezar Aa Jao in Hindi by Ahmad Ali Barqi Azmi. Download free Gul-badan Gul-ezar Aa Jao Poem for Youth in PDF. Gul-badan Gul-ezar Aa Jao is a Poem on Inspiration for young students. Share Gul-badan Gul-ezar Aa Jao with your friends on Twitter, Whatsapp and Facebook.