Couplets Poetry (page 523)

तिरी जफ़ा को जफ़ा मैं तो कह नहीं सकता

आनंद नारायण मुल्ला

शम्अ' इक मोम के पैकर के सिवा कुछ भी न थी

आनंद नारायण मुल्ला

सर-ए-महशर यही पूछूँगा ख़ुदा से पहले

आनंद नारायण मुल्ला

रोने वाले तुझे रोने का सलीक़ा ही नहीं

आनंद नारायण मुल्ला

निज़ाम-ए-मय-कदा साक़ी बदलने की ज़रूरत है

आनंद नारायण मुल्ला

नज़र जिस की तरफ़ कर के निगाहें फेर लेते हो

आनंद नारायण मुल्ला

न जाने कितनी शमएँ गुल हुईं कितने बुझे तारे

आनंद नारायण मुल्ला

'मुल्ला' बना दिया है इसे भी महाज़-ए-जंग

आनंद नारायण मुल्ला

मुख़्तसर अपनी हदीस-ए-ज़ीस्त ये है इश्क़ में

आनंद नारायण मुल्ला

मुझे कर के चुप कोई कहता है हँस कर

आनंद नारायण मुल्ला

मोहब्बत फ़र्क़ खो देती है आ'ला और अदना का

आनंद नारायण मुल्ला

मैं फ़क़त इंसान हूँ हिन्दू मुसलमाँ कुछ नहीं

आनंद नारायण मुल्ला

ख़ून-ए-जिगर के क़तरे और अश्क बन के टपकें

आनंद नारायण मुल्ला

ख़ुदा जाने दुआ थी या शिकायत लब पे बिस्मिल के

आनंद नारायण मुल्ला

कहने को लफ़्ज़ दो हैं उम्मीद और हसरत

आनंद नारायण मुल्ला

जिस के ख़याल में हूँ गुम उस को भी कुछ ख़याल है

आनंद नारायण मुल्ला

इश्क़ में वो भी एक वक़्त है जब

आनंद नारायण मुल्ला

इश्क़ करता है तो फिर इश्क़ की तौहीन न कर

आनंद नारायण मुल्ला

इश्क़ करता है तो फिर इश्क़ की तौहीन न कर

आनंद नारायण मुल्ला

हुस्न के जल्वे नहीं मुहताज-ए-चश्म-ए-आरज़ू

आनंद नारायण मुल्ला

हम ने भी की थीं कोशिशें हम न तुम्हें भुला सके

आनंद नारायण मुल्ला

हर इक सूरत पे धोका खा रही हैं तेरी सूरत का

आनंद नारायण मुल्ला

हद-ए-तकमील को पहुँची तिरी रानाई-ए-हुस्न

आनंद नारायण मुल्ला

ग़म-ए-हयात शरीक-ए-ग़म-ए-मोहब्बत है

आनंद नारायण मुल्ला

गले लगा के किया नज़्र-ए-शो'ला-ए-आतिश

आनंद नारायण मुल्ला

फ़र्क़ जो कुछ है वो मुतरिब में है और साज़ में है

आनंद नारायण मुल्ला

एक इक लम्हे में जब सदियों की सदियाँ कट गईं

आनंद नारायण मुल्ला

दिल-ए-बेताब का अंदाज़-ए-बयाँ है वर्ना

आनंद नारायण मुल्ला

दयार-ए-इश्क़ है ये ज़र्फ़-ए-दिल की जाँच होती है

आनंद नारायण मुल्ला

अश्क-ए-ग़म-ए-उल्फ़त में इक राज़-ए-निहानी है

आनंद नारायण मुल्ला