Couplets Poetry (page 525)

कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा

अमजद इस्लाम अमजद

जिस तरफ़ तू है उधर होंगी सभी की नज़रें

अमजद इस्लाम अमजद

हमें हमारी अनाएँ तबाह कर देंगी

अमजद इस्लाम अमजद

बड़े सुकून से डूबे थे डूबने वाले

अमजद इस्लाम अमजद

झोलियाँ सब की भरती जाती हैं

अमजद हैदराबादी

ढूँडती हैं जिसे मिरी आँखें

अमजद हैदराबादी

बर्बाद न कर बेकस का चमन बेदर्द ख़िज़ाँ से कौन कहे

अमजद हैदराबादी

ज़माने से निराला है उरूस-ए-फ़िक्र का जौबन

अमीरुल्लाह तस्लीम

तड़पती देखता हूँ जब कोई शय

अमीरुल्लाह तस्लीम

सुब्ह होती है शाम होती है

अमीरुल्लाह तस्लीम

नासेह ख़ता मुआफ़ सुनें क्या बहार में

अमीरुल्लाह तस्लीम

क्या ख़बर मुझ को ख़िज़ाँ क्या चीज़ है कैसी बहार

अमीरुल्लाह तस्लीम

कीजिए ऐसा जहाँ पैदा जहाँ कोई न हो

अमीरुल्लाह तस्लीम

ख़ाली सही बला से तसल्ली तो दिल को हो

अमीरुल्लाह तस्लीम

जाने दे सब्र ओ क़रार ओ होश को

अमीरुल्लाह तस्लीम

हम ने पाला मुद्दतों पहलू में हम कोई नहीं

अमीरुल्लाह तस्लीम

गर यही है पास-ए-आदाब-ए-सुकूत

अमीरुल्लाह तस्लीम

फ़िक्र है शौक़-ए-कमर इश्क़-ए-दहाँ पैदा करूँ

अमीरुल्लाह तस्लीम

दिमाग़ दे जो ख़ुदा गुलशन-ए-मोहब्बत में

अमीरुल्लाह तस्लीम

दिल-लगी में हसरत-ए-दिल कुछ निकल जाती तो है

अमीरुल्लाह तस्लीम

दिल धड़कता है शब-ए-ग़म में कहीं ऐसा न हो

अमीरुल्लाह तस्लीम

दास्तान-ए-शौक़-ए-दिल ऐसी नहीं थी मुख़्तसर

अमीरुल्लाह तस्लीम

बस कि थी रोने की आदत वस्ल में भी यार से

अमीरुल्लाह तस्लीम

अहद के बअ'द लिए बोसे दहन के इतने

अमीरुल्लाह तस्लीम

आस क्या अब तो उमीद-ए-नाउमीदी भी नहीं

अमीरुल्लाह तस्लीम

ज़ाहिरन तोड़ लिया हम ने बुतों से रिश्ता

आमिर उस्मानी

ये क़दम क़दम बलाएँ ये सवाद-ए-कू-ए-जानाँ

आमिर उस्मानी

उस के वादों से इतना तो साबित हुआ उस को थोड़ा सा पास-ए-तअल्लुक़ तो है

आमिर उस्मानी

सबक़ मिला है ये अपनों का तजरबा कर के

आमिर उस्मानी

मिरी ज़िंदगी का हासिल तिरे ग़म की पासदारी

आमिर उस्मानी