Couplets Poetry (page 526)
कितनी पामाल उमंगों का है मदफ़न मत पूछ
आमिर उस्मानी
इश्क़ सर-ता-ब-क़दम आतिश-ए-सोज़ाँ है मगर
आमिर उस्मानी
इश्क़ के मराहिल में वो भी वक़्त आता है
आमिर उस्मानी
हमें आख़िरत में 'आमिर' वही उम्र काम आई
आमिर उस्मानी
बाक़ी ही क्या रहा है तुझे माँगने के बाद
आमिर उस्मानी
अक़्ल थक कर लौट आई जादा-ए-आलाम से
आमिर उस्मानी
आबलों का शिकवा क्या ठोकरों का ग़म कैसा
आमिर उस्मानी
इश्क़ से बाज़ आते हम दीवाने क्या
आमिर मौसवी
हम ख़ुदा भी मान लेंगे आप को
आमिर मौसवी
ये गर्द है मिरी आँखों में किन ज़मानों की
अमीर हम्ज़ा साक़िब
तुम्हारी ज़ात हवाला है सुर्ख़-रूई का
अमीर हम्ज़ा साक़िब
तू आया लौट आया है गुज़रे दिनों का नूर
अमीर हम्ज़ा साक़िब
तेरी ख़ुशबू तिरा पैकर है मिरे शेरों में
अमीर हम्ज़ा साक़िब
तह कर चुके बिसात-ए-ग़म-ओ-फ़िक्र-ए-रोज़गार
अमीर हम्ज़ा साक़िब
रौशन अलाव होते ही आया तरंग में
अमीर हम्ज़ा साक़िब
फिर बदन में थकन की गर्द लिए
अमीर हम्ज़ा साक़िब
मेरी दुनिया इसी दुनिया में कहीं रहती है
अमीर हम्ज़ा साक़िब
मेरी बरहना पुश्त थी कोड़ों से सब्ज़ ओ सुर्ख़
अमीर हम्ज़ा साक़िब
मकाँ उजाड़ था और ला-मकाँ की ख़्वाहिश थी
अमीर हम्ज़ा साक़िब
लहू जिगर का हुआ सर्फ़-ए-रंग-ए-दस्त-ए-हिना
अमीर हम्ज़ा साक़िब
ख़बर भी है तुझे इस दफ़्तर-ए-मोहब्बत को
अमीर हम्ज़ा साक़िब
एक जहान-ए-ला-यानी ग़र्क़ाब हुआ
अमीर हम्ज़ा साक़िब
ज़िंदगी अपना सफ़र तय तो करेगी लेकिन
अमीता परसुराम 'मीता'
वही चर्चे वही क़िस्से मिली रुस्वाइयाँ हम को
अमीता परसुराम 'मीता'
तुझी से गुफ़्तुगू हर दम तिरी ही जुस्तुजू हर दम
अमीता परसुराम 'मीता'
सुब्ह-ए-रौशन को अंधेरों से भरी शाम न दे
अमीता परसुराम 'मीता'
न हों ख़्वाहिशें न गिला कोई न जफ़ा कोई
अमीता परसुराम 'मीता'
कुछ तो एहसास-ए-मोहब्बत से हुईं नम आँखें
अमीता परसुराम 'मीता'
कोई तदबीर न तक़दीर से लेना-देना
अमीता परसुराम 'मीता'
कौन था मेरे अलावा उस का
अमीता परसुराम 'मीता'