Couplets Poetry (page 528)

होना पड़ा है ख़ूगर-ए-ग़म भी ख़ुशी की ख़ैर

अमीर क़ज़लबाश

हर क़दम पे नाकामी हर क़दम पे महरूमी

अमीर क़ज़लबाश

इक परिंदा अभी उड़ान में है

अमीर क़ज़लबाश

एक ख़बर है तेरे लिए

अमीर क़ज़लबाश

अपने हमराह ख़ुद चला करना

अमीर क़ज़लबाश

आज की रात भी गुज़री है मिरी कल की तरह

अमीर क़ज़लबाश

आइने से नज़र चुराते हैं

अमीर क़ज़लबाश

ज़ीस्त का ए'तिबार क्या है 'अमीर'

अमीर मीनाई

ज़ाहिद उमीद-ए-रहमत-ए-हक़ और हज्व-ए-मय

अमीर मीनाई

ज़ब्त देखो उधर निगाह न की

अमीर मीनाई

ये कहूँगा ये कहूँगा ये अभी कहते हो

अमीर मीनाई

ये भी इक बात है अदावत की

अमीर मीनाई

यार पहलू में है तन्हाई है कह दो निकले

अमीर मीनाई

वो दुश्मनी से देखते हैं देखते तो हैं

अमीर मीनाई

वो और वा'दा वस्ल का क़ासिद नहीं नहीं

अमीर मीनाई

वस्ल में ख़ाली हुई ग़ैर से महफ़िल तो क्या

अमीर मीनाई

वस्ल का दिन और इतना मुख़्तसर

अमीर मीनाई

वस्ल हो जाए यहीं हश्र में क्या रक्खा है

अमीर मीनाई

वही रह जाते हैं ज़बानों पर

अमीर मीनाई

वाए क़िस्मत वो भी कहते हैं बुरा

अमीर मीनाई

उस की हसरत है जिसे दिल से मिटा भी न सकूँ

अमीर मीनाई

उल्फ़त में बराबर है वफ़ा हो कि जफ़ा हो

अमीर मीनाई

तुम को आता है प्यार पर ग़ुस्सा

अमीर मीनाई

तूल-ए-शब-ए-फ़िराक़ का क़िस्सा न पूछिए

अमीर मीनाई

तुझ से माँगूँ मैं तुझी को कि सभी कुछ मिल जाए

अमीर मीनाई

तीर पर तीर लगाओ तुम्हें डर किस का है

अमीर मीनाई

तीर खाने की हवस है तो जिगर पैदा कर

अमीर मीनाई

तेरी मस्जिद में वाइज़ ख़ास हैं औक़ात रहमत के

अमीर मीनाई

तवक़्क़ो' है धोके में आ कर वह पढ़ लें

अमीर मीनाई

तरफ़-ए-काबा न जा हज के लिए नादाँ है

अमीर मीनाई