Couplets Poetry (page 529)
सीधी निगाह में तिरी हैं तीर के ख़्वास
अमीर मीनाई
शौक़ कहता है पहुँच जाऊँ मैं अब काबे में जल्द
अमीर मीनाई
शाख़ों से बर्ग-ए-गुल नहीं झड़ते हैं बाग़ में
अमीर मीनाई
शैख़ कहता है बरहमन को बरहमन उस को सख़्त
अमीर मीनाई
शाएर को मस्त करती है तारीफ़-ए-शेर 'अमीर'
अमीर मीनाई
शब-ए-विसाल बहुत कम है आसमाँ से कहो
अमीर मीनाई
शब-ए-फ़ुर्क़त का जागा हूँ फ़रिश्तो अब तो सोने दो
अमीर मीनाई
सौ शेर एक जलसे में कहते थे हम 'अमीर'
अमीर मीनाई
सारी दुनिया के हैं वो मेरे सिवा
अमीर मीनाई
सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता
अमीर मीनाई
सारा पर्दा है दुई का जो ये पर्दा उठ जाए
अमीर मीनाई
समझता हूँ सबब काफ़िर तिरे आँसू निकलने का
अमीर मीनाई
सादा समझो न इन्हें रहने दो दीवाँ में 'अमीर'
अमीर मीनाई
सब हसीं हैं ज़ाहिदों को ना-पसंद
अमीर मीनाई
रोज़-ओ-शब याँ एक सी है रौशनी
अमीर मीनाई
रास्ते और तवाज़ो' में है रब्त-ए-क़ल्बी
अमीर मीनाई
रहा ख़्वाब में उन से शब भर विसाल
अमीर मीनाई
क़रीब है यारो रोज़-ए-महशर छुपेगा कुश्तों का ख़ून क्यूँकर
अमीर मीनाई
पुतलियाँ तक भी तो फिर जाती हैं देखो दम-ए-नज़अ
अमीर मीनाई
पूछा न जाएगा जो वतन से निकल गया
अमीर मीनाई
फिर बैठे बैठे वादा-ए-वस्ल उस ने कर लिया
अमीर मीनाई
पहलू में मेरे दिल को न ऐ दर्द कर तलाश
अमीर मीनाई
पहले तो मुझे कहा निकालो
अमीर मीनाई
नावक-ए-नाज़ से मुश्किल है बचाना दिल का
अमीर मीनाई
नब्ज़-ए-बीमार जो ऐ रश्क-ए-मसीहा देखी
अमीर मीनाई
न वाइज़ हज्व कर एक दिन दुनिया से जाना है
अमीर मीनाई
मुश्किल बहुत पड़ेगी बराबर की चोट है
अमीर मीनाई
मुद्दत में शाम-ए-वस्ल हुई है मुझे नसीब
अमीर मीनाई
मुद्दत में शाम-ए-वस्ल हुई है मुझे नसीब
अमीर मीनाई
मिसी छूटी हुई सूखे हुए होंट
अमीर मीनाई