Couplets Poetry (page 530)

मिली है दुख़्तर-ए-रज़ लड़-झगड़ के क़ाज़ी से

अमीर मीनाई

मिला कर ख़ाक में भी हाए शर्म उन की नहीं जाती

अमीर मीनाई

मिरा ख़त उस ने पढ़ा पढ़ के नामा-बर से कहा

अमीर मीनाई

मौक़ूफ़ जुर्म ही पे करम का ज़ुहूर था

अमीर मीनाई

मस्जिद में बुलाते हैं हमें ज़ाहिद-ए-ना-फ़हम

अमीर मीनाई

मानी हैं मैं ने सैकड़ों बातें तमाम उम्र

अमीर मीनाई

माँग लूँ तुझ से तुझी को कि सभी कुछ मिल जाए

अमीर मीनाई

लुत्फ़ आने लगा जफ़ाओं में

अमीर मीनाई

लाए कहाँ से उस रुख़-ए-रौशन की आब-ओ-ताब

अमीर मीनाई

किसी रईस की महफ़िल का ज़िक्र ही क्या है

अमीर मीनाई

किस ढिटाई से वो दिल छीन के कहते हैं 'अमीर'

अमीर मीनाई

ख़्वाब में आँखें जो तलवों से मलीं

अमीर मीनाई

ख़ुश्क सेरों तन-ए-शाएर का लहू होता है

अमीर मीनाई

ख़ुशामद ऐ दिल-ए-बेताब इस तस्वीर की कब तक

अमीर मीनाई

ख़ून-ए-नाहक़ कहीं छुपता है छुपाए से 'अमीर'

अमीर मीनाई

ख़ुदा ने नेक सूरत दी तो सीखो नेक बातें भी

अमीर मीनाई

ख़ंजर चले किसी पे तड़पते हैं हम 'अमीर'

अमीर मीनाई

कौन उठाएगा तुम्हारी ये जफ़ा मेरे बाद

अमीर मीनाई

कौन सी जा है जहाँ जल्वा-ए-माशूक़ नहीं

अमीर मीनाई

करता मैं दर्दमंद तबीबों से क्या रुजूअ

अमीर मीनाई

कहते हो कि हमदर्द किसी का नहीं सुनते

अमीर मीनाई

काबा-ए-रुख़ की तरफ़ पढ़नी है आँखों से नमाज़

अमीर मीनाई

कबाब-ए-सीख़ हैं हम करवटें हर-सू बदलते हैं

अमीर मीनाई

जो चाहिए सो माँगिये अल्लाह से 'अमीर'

अमीर मीनाई

जिस ग़ुंचा-लब को छेड़ दिया ख़ंदा-ज़न हुआ

अमीर मीनाई

जवाँ होने लगे जब वो तो हम से कर लिया पर्दा

अमीर मीनाई

इन शोख़ हसीनों पे जो माइल नहीं होता

अमीर मीनाई

हम जो पहुँचे तो लब-ए-गोर से आई ये सदा

अमीर मीनाई

हुए नामवर बे-निशाँ कैसे कैसे

अमीर मीनाई

हो गया बंद दर-ए-मै-कदा क्या क़हर हुआ

अमीर मीनाई