Couplets Poetry (page 532)
आफ़त तो है वो नाज़ भी अंदाज़ भी लेकिन
अमीर मीनाई
आए बुत-ख़ाने से काबे को तो क्या भर पाया
अमीर मीनाई
आबरू शर्त है इंसाँ के लिए दुनिया में
अमीर मीनाई
ज़े-हाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल दुराय नैनाँ बनाए बतियाँ
अमीर ख़ुसरो
शबान-ए-हिज्राँ दराज़ चूँ ज़ुल्फ़ रोज़-ए-वसलत चू उम्र कोताह
अमीर ख़ुसरो
चूँ शम-ए-सोज़ाँ चूँ ज़र्रा हैराँ ज़े मेहर-ए-आँ-मह बगश्तम आख़िर
अमीर ख़ुसरो
ये कार-ए-ज़िंदगी था तो करना पड़ा मुझे
अमीर इमाम
वो मारका कि आज भी सर हो नहीं सका
अमीर इमाम
शहर में सारे चराग़ों की ज़िया ख़ामोश है
अमीर इमाम
पहले सहरा से मुझे लाया समुंदर की तरफ़
अमीर इमाम
न आबशार न सहरा लगा सके क़ीमत
अमीर इमाम
जो शाम होती है हर रोज़ हार जाता हूँ
अमीर इमाम
इस बार राह-ए-इश्क़ कुछ इतनी तवील थी
अमीर इमाम
धूप में कौन किसे याद किया करता है
अमीर इमाम
अपनी तरफ़ तो मैं भी नहीं हूँ अभी तलक
अमीर इमाम
उन आँखों में डाल कर जब आँखें उस रात
अमीक़ हनफ़ी
फूल खिले हैं लिखा हुआ है तोड़ो मत
अमीक़ हनफ़ी
ख़्वाहिशों की बिजलियों की जलती बुझती रौशनी
अमीक़ हनफ़ी
एक उसी को देख न पाए वर्ना शहर की सड़कों पर
अमीक़ हनफ़ी
दोनों का मिलना मुश्किल है दोनों हैं मजबूर बहुत
अमीक़ हनफ़ी
दिल में दुख आँखों में नमी आसमाँ पर घटाएँ
अमीक़ हनफ़ी
सिगरेट जिसे सुलगता हुआ कोई छोड़ दे
अमीक़ हनफ़ी
छूते ही आशाएँ बिखरीं जैसे सपने टूट गए
अमीक़ हनफ़ी
आता हूँ मैं ज़माने की आँखों में रात दिन
अमीक़ हनफ़ी
ज़ात के पर्दे से बाहर आ के भी तन्हा रहूँ
अमीन राहत चुग़ताई
शोर करता फिर रहा हूँ ख़ुश्क पत्तों की तरह
अमीन राहत चुग़ताई
मैं आइना था छुपाता किसी को क्या राहत
अमीन राहत चुग़ताई
किस तरह उजड़े सुलगती हुई यादों के दिए
अमीन राहत चुग़ताई
हम एक जाँ ही सही दिल तो अपने अपने थे
अमीन राहत चुग़ताई
अब अनासिर में तवाज़ुन ढूँडने जाएँ कहाँ
अमीन राहत चुग़ताई