Couplets Poetry (page 522)

चराग़ चाँद शफ़क़ शाम फूल झील सबा

अंजुम इरफ़ानी

अदा हुआ न कभी मुझ से एक सज्दा-ए-शुक्र

अंजुम इरफ़ानी

आबादियों में कैसे दरिंदे घुस आए हैं

अंजुम इरफ़ानी

उस ने मजबूर-ए-वफ़ा जान के मुँह फेर लिया

अंजुम फ़ौक़ी बदायूनी

निकलो भी कभी सूद-ओ-ज़ियाँ से वर्ना

अंजुम आज़मी

कोई तो ख़ैर का पहलू भी निकले

अंजुम आज़मी

ख़ाली भी तो कर ख़ाना-ए-दिल दुनिया से

अंजुम आज़मी

उन से इज़हार-ए-मुद्दआ न किया

अनीसा बेगम

मूसा नहीं कि ताब न लाऊँ मैं हुस्न की

अनीसा बेगम

क्या बर्बाद जिन को वो तमन्नाएँ तुम्हारी थीं

अनीसा बेगम

जाते ही उन के ज़ीस्त की सूरत बदल गई

अनीसा बेगम

दयार-ए-इश्क़ में तन्हा रहा नहीं हरगिज़

अनीसा बेगम

ये ख़ाना हमेशा से वीरान है

अनीस अशफ़ाक़

उस की मुट्ठी में जवाहिर थे नज़र मेरी तरफ़

अनीस अशफ़ाक़

न मेरे हाथ से छुटना है मेरे नेज़े को

अनीस अशफ़ाक़

क्यूँ नहीं होते मुनाजातों के मअनी मुन्कशिफ़

अनीस अशफ़ाक़

इस पे हैराँ हैं ख़रीदार कि क़ीमत है बहुत

अनीस अशफ़ाक़

देखा है किसी आहू-ए-ख़ुश-चश्म को उस ने

अनीस अशफ़ाक़

बड़ा आज़ार-ए-जाँ है वो अगरचे मेहरबाँ है वो

अनीस अंसारी

उफ़ वो तूफ़ान-ए-शबाब आह वो सीना तेरा

अंदलीब शादानी

जिगर में टीस लब हँसने पे मजबूर

अंदलीब शादानी

झूट है सब तारीख़ हमेशा अपने को दुहराती है

अंदलीब शादानी

दिल पर चोट पड़ी है तब तो आह लबों तक आई है

अंदलीब शादानी

देर लगी आने में तुम को शुक्र है फिर भी आए तो

अंदलीब शादानी

चाहत के बदले में हम बेच दें अपनी मर्ज़ी तक

अंदलीब शादानी

वो कौन हैं जिन्हें तौबा की मिल गई फ़ुर्सत

आनंद नारायण मुल्ला

वो दुनिया थी जहाँ तुम रोक लेते थे ज़बाँ मेरी

आनंद नारायण मुल्ला

उस इक नज़र के बज़्म में क़िस्से बने हज़ार

आनंद नारायण मुल्ला

तुम जिस को समझते हो कि है हुस्न तुम्हारा

आनंद नारायण मुल्ला

तू ने फेरी लाख नर्मी से नज़र

आनंद नारायण मुल्ला