Ghazal Poetry (page 446)

मैं खुजूरों भरे सहराओं में देखा गया हूँ

नदीम भाभा

मैं ऐसे मोड़ पर अपनी कहानी छोड़ आया हूँ

नदीम भाभा

जैसा हूँ जिस हाल में हूँ अच्छा हूँ मैं

नदीम भाभा

हिज्र हूँ पूरा हिज्र हूँ इश्क़ विसाल करे

नदीम भाभा

हर एक साँस पे धड़का कि आख़िरी तो नहीं

नदीम भाभा

हालत-ए-हाल में आदाब नहीं भूलता मैं

नदीम भाभा

एक सुख़न को भूल कर एक कलाम था ज़रूर

नदीम भाभा

दिल से इक याद भुला दी गई है

नदीम भाभा

दिल मुब्तला-ए-हिज्र रिफ़ाक़त में रह गया

नदीम भाभा

देख ऐ शख़्स मुझे यूँ न गिरफ़्तार समझ

नदीम भाभा

बहुत शिद्दत से जो क़ाएम हुआ था

नदीम भाभा

अजीब हूँ कि मोहब्बत शनास हो कर भी

नदीम भाभा

आँख उठा कर तुझे देखा न पुकारा मैं ने

नदीम भाभा

याद पड़ता तो नहीं कब मिरा देखा हुआ है

नदीम अहमद

रुकना पड़ेगा और भी चलने के नाम पर

नदीम अहमद

पाने की तरह का न तो खोने की तरह का

नदीम अहमद

मुँह-अँधेरे ही कोई घर से निकलता हुआ था

नदीम अहमद

मिरी नज़र को दर-ओ-बाम पर लगाया हुआ है

नदीम अहमद

ख़ाक अतराफ़ में उड़ती है बहुत पानी दे

नदीम अहमद

जहाँ पे होता हूँ अक्सर वहाँ नहीं होता

नदीम अहमद

एक तो काविश-ए-जिगर भी करूँ

नदीम अहमद

ज़िंदगी तेरी तमन्ना में बसर हो जाए

नबील अहमद नबील

ये कैसा कार-ए-दुनिया हो रहा है

नबील अहमद नबील

ये हादिसा भी सर-ए-रहगुज़ार होना था

नबील अहमद नबील

वो हैं तय्यार इमारत को गिराने वाले

नबील अहमद नबील

वो एक शख़्स ब-अंदाज़-ए-महरमाना मिला

नबील अहमद नबील

तुम ने किया है तुम ने इशारा बहुत ग़लत

नबील अहमद नबील

तू न आएगा मुझे जब से यक़ीं आ गया है

नबील अहमद नबील

तिनके का हाथ आया सहारा ग़लत ग़लत

नबील अहमद नबील

तेरी तलाश तेरी तमन्ना तो मैं भी हूँ

नबील अहमद नबील