Ghazal Poetry (page 501)

सरिश्क-ए-ख़ूँ सर-ए-मिज़्गाँ कभी पिरोए न थे

मोहसिन एहसान

सर पे तेग़-ए-बे-अमाँ हाथों में प्याला ज़हर का

मोहसिन एहसान

सैल-ए-बला-ए-ग़म न पूछ कितने घरौंदे ढह गए

मोहसिन एहसान

सहर से एक किरन की फ़क़त तलब थी मुझे

मोहसिन एहसान

सफ़र में याद न आए कोई ठिकाना हमें

मोहसिन एहसान

साए की उम्मीद थी तारीकियाँ फैला गया

मोहसिन एहसान

सबा में था न दिल-आवेज़ी-ए-बहार में था

मोहसिन एहसान

रौशनियाँ बदन बदन तेरे मिरे लहू से हैं

मोहसिन एहसान

राख कुछ दिल में ज़ियादा है शरारा कम है

मोहसिन एहसान

निगार-ए-फ़न पे हरीफ़ान-ए-शे'र की यलग़ार

मोहसिन एहसान

मोहब्बतों का ख़रीदार ढूँडने निकला

मोहसिन एहसान

मिला भी क्या उसे तौहीन-ए-रंग-ओ-बू कर के

मोहसिन एहसान

मिरी नवा मिरी तदबीर तक नहीं पहुँची

मोहसिन एहसान

मिरे वजूद के दोज़ख़ को सर्द कर देगा

मोहसिन एहसान

मौत से यारी न थी हस्ती से बे-ज़ारी न थी

मोहसिन एहसान

मैं एक उम्र के बा'द आज ख़ुद को समझा हूँ

मोहसिन एहसान

लिबास तन पे सलामत हैं हाथ ख़ाली हैं

मोहसिन एहसान

किसी के सामने इज़हार-ए-दर्द-ए-जाँ न करूँ

मोहसिन एहसान

किस ए'तिमाद से इल्ज़ाम धर गए अपने

मोहसिन एहसान

ख़ुलूस हो तो दुआ में असर भी आता है

मोहसिन एहसान

खुली आँखों से सपना देखने में

मोहसिन एहसान

ख़ुद से ना-ख़ुश ग़ैर से बे-ज़ार होना था हुए

मोहसिन एहसान

ख़ुद से ना-ख़ुश ग़ैर से बेज़ार होना था हुए

मोहसिन एहसान

ख़ुद अपनी ज़ात की तश्हीर कू-ब-कू किए जाएँ

मोहसिन एहसान

ख़ुद अपने आप से ये गिला उम्र भर किया

मोहसिन एहसान

कैसे कहें दर-ब-दर नहीं हम

मोहसिन एहसान

इस कड़ी धूप के सन्नाटे में हैरान हुआ

मोहसिन एहसान

हम भी ज़िंदा हैं अजब काविश-ए-इज़हार के साथ

मोहसिन एहसान

हवा-ओ-हिर्स की दुनिया में दर-ब-दर हुए हम

मोहसिन एहसान

हौसला तू ने दिया दुख की पज़ीराई का

मोहसिन एहसान