ख्वाब Poetry (page 70)

फेंका था किस ने संग-ए-हवस रात ख़्वाब में

असलम आज़ाद

अपना मकान भी था उसी मोड़ पर मगर

असलम आज़ाद

यादों का लम्स ज़ेहन को छू कर गुज़र गया

असलम आज़ाद

किश्त-ए-दिल वीराँ सही तुख़्म-ए-हवस बोया नहीं

असलम आज़ाद

कहीं पे क़ुर्ब की लज़्ज़त का इक़्तिबास नहीं

असलम आज़ाद

कहीं पे क़ुर्ब की लज़्ज़त का इक़्तिबास नहीं

असलम आज़ाद

जगमगाती ख़्वाहिशों का नूर फैला रात भर

असलम आज़ाद

अजीब शख़्स है मुझ को तो वो दिवाना लगे

असलम आज़ाद

आँखों से मैं ने चख लिया मौसम के ज़हर को

असलम आज़ाद

हम ने हर ख़्वाब को ताबीर अता की 'असलम'

असलम अंसारी

एक नज़्म

असलम अंसारी

वो रंग उड़े हैं कुछ अब के बरस बहारों के

असलम अंसारी

वो नख़्ल जो बार-वर हुए हैं

असलम अंसारी

लरज़ लरज़ के दिल-ए-ना-तवाँ ठहर ही न जाए

असलम अंसारी

कुछ तो ग़म-ख़ाना-ए-हस्ती में उजाला होता

असलम अंसारी

ख़फ़ा न हो कि तिरा हुस्न ही कुछ ऐसा था

असलम अंसारी

जब हमें इज़्न तमाशा होगा

असलम अंसारी

हर शख़्स इस हुजूम में तन्हा दिखाई दे

असलम अंसारी

एक समुंदर एक किनारा एक सितारा काफ़ी है

असलम अंसारी

ऐन-मुमकिन है किसी तर्ज़-ए-अदा में आए

असलम अंसारी

ख़्वाब का इंतिज़ार ख़त्म हुआ

आसिमा ताहिर

ज़ख़्म खा के भी मुस्कुराते हैं

आसिमा ताहिर

अपनी हालत पे आँसू बहाने लगे

आसिमा ताहिर

अपनी आँखें जो बंद कर देखूँ

आसिमा ताहिर

कहाँ तलाश में जाऊँ कि जुस्तुजू तू है

आसिम वास्ती

होंटों को फूल आँख को बादा नहीं कहा

आसिम वास्ती

ऐ मिरे दिल बता ख़्वाब बुनता है क्यूँ

अासिफ़ा ज़मानी

वो मेरे ख़्वाब ले के सिरहाने खड़ा रहा

अासिफ़ा निशात

दरयाफ़्त कर लिया है बसाया नहीं मुझे

अासिफ़ा निशात

अपना घर बाज़ार में क्यूँ रख दिया

अासिफ़ा निशात