ख्वाब Poetry (page 79)

हुआ करे अगर उस को कोई गिला होगा

अनवर अंजुम

धूप हो गए साए जल गए शजर जैसे

अनवर अंजुम

चाँद तारे जिसे हर शब देखें

अनवर अंजुम

ख़ुदा भी मेरी तरह बा-कमाल ऐसा था

अनवर महमूद खालिद

जो हो सका न मिरा उस को भूल जाऊँ मैं

अनवर महमूद खालिद

जो हो सका न मिरा उस को भूल जाऊँ मैं

अनवर महमूद खालिद

ये दिल ही जानता है फिर कहाँ कहाँ भटके

अनुभव गुप्ता

दिल यही सोच के बेताब हुआ जाता है

अनुभव गुप्ता

हयात-ए-राएगाँ है और मैं हूँ

अंजुम सिद्दीक़ी

शब-ए-जमाल सलामत रहें तिरे परी-ज़ाद

अंजुम सलीमी

ख़्वाब शर्मिंदा-ए-विसाल हुआ

अंजुम सलीमी

एक ताबीर की सूरत नज़र आई है इधर

अंजुम सलीमी

पुर्सा

अंजुम सलीमी

मेरी बे-लिबासी तुम्हारा पहनावा नहीं

अंजुम सलीमी

मैं और मेरी तन्हाई

अंजुम सलीमी

एक क़दीम ख़याली की निगरानी में

अंजुम सलीमी

आइंदगाँ की उदासी में

अंजुम सलीमी

मैं जब वजूद से होते हुए गुज़रता हूँ

अंजुम सलीमी

अच्छे मौसम में तग-ओ-ताज़ भी कर लेता हूँ

अंजुम सलीमी

मौसम का आह-ओ-नाला से अंदाज़ा कीजिए

अंजुम रूमानी

जहाँ तक गया कारवान-ए-ख़याल

अंजुम रूमानी

जाए ख़िरद नहीं है कि फ़रज़ाना चाहिए

अंजुम रूमानी

आग बहते हुए पानी में लगाने आई

अंजुम रहबर

दिल भर आया फिर भी राज़-ए-दिल छुपाना ही पड़ा

अंजुम मानपुरी

तोड़ कड़ियाँ ज़मीर कि 'अंजुम'

अंजुम लुधियानवी

हम सा दीवाना कहाँ मिल पाएगा इस दहर में

अंजुम लुधियानवी

शब-ए-फ़िराक़ अचानक ख़याल आया मुझे

अंजुम ख़याली

तुम्हारी पोरों का लम्स अब तक.....

अंजुम ख़लीक़

पलकों तक आ के अश्क का सैलाब रह गया

अंजुम ख़लीक़

मिरे जुनूँ को हवस में शुमार कर लेगा

अंजुम ख़लीक़