ख्वाब Poetry (page 78)
इज़ाफ़ी ज़रूरतों के लिए एक नज़्म
अनवर सेन रॉय
आबाद अब न होगा मय-ख़ाना ज़िंदगी का
अनवर सहारनपुरी
जागती आँख से जो ख़्वाब था देखा 'अनवर'
अनवर सदीद
चला मैं जानिब-ए-मंज़िल तो ये हुआ मालूम
अनवर सदीद
एक ख़्वाहिश
अनवर सदीद
तुझ को तो क़ुव्वत-ए-इज़हार ज़माने से मिली
अनवर सदीद
हद-ए-नज़र से मिरा आसमाँ है पोशीदा
अनवर सदीद
दीवार पर लिखा न पढ़ो और ख़ुश रहो
अनवर सदीद
तसव्वुर के सहारे यूँ शब-ए-ग़म ख़त्म की मैं ने
अनवर साबरी
तज्दीद-ए-रस्म-ओ-राह-ए-मुलाक़ात कीजिए
अनवर साबरी
न होंगे हम तो ये रंग-ए-गुलिस्ताँ कौन देखेगा
अनवर साबरी
इश्क़ मुकम्मल ख़्वाब-ए-परेशाँ
अनवर साबरी
अता-ए-ग़म पे भी ख़ुश हूँ मिरी ख़ुशी क्या है
अनवर साबरी
प्यार को पा कर जो महरूमी हुई
अनवर नदीम
मख़मली ख़्वाब का आँखों में न मंज़र फैला
अनवर मीनाई
ख़्वाब बिखरेंगे तो हम को भी बिखरना होगा
अनवर मीनाई
हर मंज़र-ए-ख़ुश-रंग सुलग जाए तो क्या हो
अनवर मीनाई
'अनवर' उस ने न मैं ने छोड़ा है
अनवर मसूद
उस हसीं के ख़याल में रहना
अनवर मसूद
कब तलक यूँ धूप छाँव का तमाशा देखना
अनवर मसूद
इशारतों की वो शर्हें वो तज्ज़िया भी गया
अनवर मसूद
तुम्हारे दिल में कोई और भी है मेरे सिवा
अनवर जमाल अनवर
हुस्न ऐसा कि ज़माने में नहीं जिस की मिसाल
अनवर जमाल अनवर
ज़िंदगी अपनी ख़्वाब जैसी है
अनवर जमाल अनवर
ज़ुल्फ़ को अब्र का टुकड़ा नहीं लिख्खा मैं ने
अनवर जलालपुरी
नज़र आए क्या मुझ से फ़ानी की सूरत
अनवर देहलवी
न मैं समझा न आप आए कहीं से
अनवर देहलवी
देखा जो मर्ग तो मरना ज़ियाँ न था
अनवर देहलवी
आँखें दिखाईं ग़ैर को मेरी ख़ता के साथ
अनवर देहलवी
कोई सदा न दूर तलक नक़्श-ए-पा कोई
अनवर अंजुम