ख्वाब Poetry (page 89)

ऐ अब्र-ए-इल्तिफ़ात तिरा ए'तिबार फिर

अकरम नक़्क़ाश

ज़ख़्म देखे न मिरे ज़ख़्म की शिद्दत देखे

अकरम महमूद

यूँ ही रक्खोगे इम्तिहाँ में क्या

अकरम महमूद

सितारा आँख में दिल में गुलाब क्या रखना

अकरम महमूद

निकल रहा हूँ यक़ीं की हद से गुमाँ की जानिब

अकरम महमूद

मंज़िल-ए-ख़्वाब है और महव-ए-सफ़र पानी है

अकरम महमूद

कोई हुनर तो मिरी चश्म-ए-अश्क-बार में है

अकरम महमूद

ख़ाक से ख़्वाब तलक एक सी वीरानी है

अकरम महमूद

आँखों में ख़्वाब ताज़ा है दिल में नया ख़याल भी

अकरम महमूद

आँख खुलने पे भी होता हूँ उसी ख़्वाब में गुम

अकरम महमूद

सिलसिले हादसों के ध्यान में रख

अकमल इमाम

गुज़रते दौड़ते लम्हे हिसाब में लिखिए

अकमल इमाम

यादें

अख़्तर-उल-ईमान

उम्र-ए-गुरेज़ाँ के नाम

अख़्तर-उल-ईमान

सुकून

अख़्तर-उल-ईमान

सब्ज़ा-ए-बेगाना

अख़्तर-उल-ईमान

काविश

अख़्तर-उल-ईमान

कार-नामा

अख़्तर-उल-ईमान

काले सफ़ेद परों वाला परिंदा और मेरी एक शाम

अख़्तर-उल-ईमान

एक लड़का

अख़्तर-उल-ईमान

एक एहसास

अख़्तर-उल-ईमान

बाज़-आमद --- एक मुन्ताज

अख़्तर-उल-ईमान

फिर वही शब के सराबों का चलन!

अख़्तर ज़ियाई

ग़म का आहंग है

अख़्तर ज़ियाई

ज़र-ए-नाब

अख़्तर उस्मान

नए सुर की तमसील

अख़्तर उस्मान

मैं अजब आदमी हूँ

अख़्तर उस्मान

बुत-साज़

अख़्तर उस्मान

अपने पहले मकान तक हो आऊँ

अख़्तर उस्मान

अभी तो पर भी नहीं तौलता उड़ान को मैं

अख़्तर उस्मान