Love Poetry (page 130)

इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से

फ़रहत एहसास

चाँद भी हैरान दरिया भी परेशानी में है

फ़रहत एहसास

बस एक लम्स कि जल जाएँ सब ख़स-ओ-ख़ाशाक

फ़रहत एहसास

औरतें काम पे निकली थीं बदन घर रख कर

फ़रहत एहसास

उस तरफ़

फ़रहत एहसास

तराना-ए-रेख़्ता

फ़रहत एहसास

शेर कह लेने के बाद

फ़रहत एहसास

समुंदर

फ़रहत एहसास

रात हुई

फ़रहत एहसास

ना-रसाई

फ़रहत एहसास

हमवारी

फ़रहत एहसास

दुनिया को कहाँ तक जाना है

फ़रहत एहसास

बिछड़े घर का साया

फ़रहत एहसास

बैज़ा-ए-नूर

फ़रहत एहसास

अगर मैं चीख़ूँ

फ़रहत एहसास

ये सारे ख़ूबसूरत जिस्म अभी मर जाने वाले हैं

फ़रहत एहसास

ये बाग़ ज़िंदा रहे ये बहार ज़िंदा रहे

फ़रहत एहसास

यही हिसाब-ए-मोहब्बत दोबारा कर के लाओ

फ़रहत एहसास

वो महफ़िलें पुरानी अफ़्साना हो रही हैं

फ़रहत एहसास

वस्ल की रात में हम रात में बह जाते हैं

फ़रहत एहसास

वहाँ मैं जाऊँ मगर कुछ मिरा भला भी तो हो

फ़रहत एहसास

उस को है इश्क़ बताना भी नहीं चाहता है

फ़रहत एहसास

उम्र बे-वज्ह गुज़ारे भी नहीं जा सकते

फ़रहत एहसास

तुम कुछ भी करो होश में आने के नहीं हम

फ़रहत एहसास

तुझे ख़बर हो तो बोल ऐ मिरे सितारा-ए-शब

फ़रहत एहसास

तेरे सूरज को तिरी शाम से पहचानते हैं

फ़रहत एहसास

तेरा भला हो तू जो समझता है मुझ को ग़ैर

फ़रहत एहसास

तन्हाई के आब-ए-रवाँ के साहिल पर बैठा हूँ मैं

फ़रहत एहसास

तह-ए-बदन कहीं बेदार होता जाता हूँ

फ़रहत एहसास

साँसें ना-हमवार मिरी

फ़रहत एहसास