Love Poetry (page 129)

ये फुर्क़तों में लम्हा-ए-विसाल कैसे आ गया

फ़रहत नदीम हुमायूँ

था पहला सफ़र उस की रिफ़ाक़त भी नई थी

फ़रहत नदीम हुमायूँ

नए मिज़ाज की तश्कील करना चाहते हैं

फ़रहत नदीम हुमायूँ

न दौलत की तलब थी और न दौलत चाहिए है

फ़रहत नदीम हुमायूँ

मोहब्बत का ये रुख़ देखा नहीं था

फ़रहत नदीम हुमायूँ

मसअला आज मिरे इश्क़ का तू हल कर दे

फ़रहत नदीम हुमायूँ

जो तुझे पैकर-ए-सद-नाज़-ओ-अदा कहते हैं

फ़रहत नदीम हुमायूँ

है वही एक मेरे सिवा और मैं

फ़रहत नदीम हुमायूँ

हाल में जीने की तदबीर भी हो सकती है

फ़रहत नदीम हुमायूँ

ऐ कातिब-ए-तक़दीर ये तक़दीर में लिख दे

फ़रहत नदीम हुमायूँ

अब ज़िंदगी रो रो के गुज़ारेंगे नहीं हम

फ़रहत नदीम हुमायूँ

दुनिया ने ख़ूब समझा दुनिया ने ख़ूब परखा

फ़रहत कानपुरी

दौलत-ए-अहद-ए-जवानी हो गए

फ़रहत कानपुरी

वो बहकी निगाहें क्या कहिए वो महकी जवानी क्या कहिए

फ़रहत कानपुरी

वस्ल के लम्हे कहानी हो गए

फ़रहत कानपुरी

तिरा जल्वा शाम-ओ-सहर देखते हैं

फ़रहत कानपुरी

कुछ तो वुफ़ूर-ए-शौक़ में बाइ'स-ए-इम्तियाज़ हो

फ़रहत कानपुरी

जो कुछ भी है नज़र में सो वहम-ए-नुमूद है

फ़रहत कानपुरी

इक ख़लिश सी है मुझे तक़दीर से

फ़रहत कानपुरी

आँखों में बसे हो तुम आँखों में अयाँ हो कर

फ़रहत कानपुरी

वो चाँद कह के गया था कि आज निकलेगा

फ़रहत एहसास

उसे ख़बर थी कि हम विसाल और हिज्र इक साथ चाहते हैं

फ़रहत एहसास

तमाम पैकर-ए-बदसूरती है मर्द की ज़ात

फ़रहत एहसास

मोहब्बत फूल बनने पर लगी थी

फ़रहत एहसास

मिरी मोहब्बत में सारी दुनिया को इक खिलौना बना दिया है

फ़रहत एहसास

लोग यूँ जाते नज़र आते हैं मक़्तल की तरफ़

फ़रहत एहसास

कौन सी ऐसी ख़ुशी है जो मिली हो एक बार

फ़रहत एहसास

कभी इस रौशनी की क़ैद से बाहर भी निकलो तुम

फ़रहत एहसास

जो इश्क़ चाहता है वो होना नहीं है आज

फ़रहत एहसास

इश्क़ में पीने का पानी बस आँख का पानी

फ़रहत एहसास