Love Poetry (page 139)

वो कहते हैं कि है टूटे हुए दिल पर करम मेरा

फ़ानी बदायुनी

वो जी गया जो इश्क़ में जी से गुज़र गया

फ़ानी बदायुनी

वा-ए-नादानी ये हसरत थी कि होता दर खुला

फ़ानी बदायुनी

तिरी तिरछी नज़र का तीर है मुश्किल से निकलेगा

फ़ानी बदायुनी

तेरा निगाह-ए-शौक़ कोई राज़-दाँ न था

फ़ानी बदायुनी

ताकीद है कि दीदा-ए-दिल वा करे कोई

फ़ानी बदायुनी

सितम-ईजाद रहोगे सितम-ईजाद रहे

फ़ानी बदायुनी

शबाब-ए-होश कि फ़िल-जुमला यादगार हुई

फ़ानी बदायुनी

सवाल-ए-दीद पे तेवरी चढ़ाई जाती है

फ़ानी बदायुनी

संग-ए-दर देख के सर याद आया

फ़ानी बदायुनी

रह जाए या बला से ये जान रह न जाए

फ़ानी बदायुनी

क़िस्सा-ए-ज़ीस्त मुख़्तसर करते

फ़ानी बदायुनी

क़तरा दरिया-ए-आश्नाई है

फ़ानी बदायुनी

क़सम न खाओ तग़ाफ़ुल से बाज़ आने की

फ़ानी बदायुनी

नाम बदनाम है नाहक़ शब-ए-तन्हाई का

फ़ानी बदायुनी

नहीं मंज़ूर तप-ए-हिज्र का रुस्वा होना

फ़ानी बदायुनी

न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मा'लूम

फ़ानी बदायुनी

मुझ को मिरे नसीब ने रोज़-ए-अज़ल से क्या दिया

फ़ानी बदायुनी

मुझ पे रखते हैं हश्र में इल्ज़ाम

फ़ानी बदायुनी

मोहताज-ए-अजल क्यूँ है ख़ुद अपनी क़ज़ा हो जा

फ़ानी बदायुनी

मिज़ाज-ए-दहर में उन का इशारा पाए जा

फ़ानी बदायुनी

माया-ए-नाज़-ए-राज़ हैं हम लोग

फ़ानी बदायुनी

मर के टूटा है कहीं सिलसिला-क़ैद-ए-हयात

फ़ानी बदायुनी

मर कर तिरे ख़याल को टाले हुए तो हैं

फ़ानी बदायुनी

मर कर मरीज़-ए-ग़म की वो हालत नहीं रही

फ़ानी बदायुनी

लुत्फ़ ओ करम के पुतले हो अब क़हर ओ सितम का नाम नहीं

फ़ानी बदायुनी

ले ए'तिबार-ए-वादा-ए-फ़र्दा नहीं रहा

फ़ानी बदायुनी

क्यूँ न नैरंग-ए-जुनूँ पर कोई क़ुर्बां हो जाए

फ़ानी बदायुनी

क्या कहिए कि बेदाद है तेरी बेदाद

फ़ानी बदायुनी

कुछ कम तो हुआ रंज-ए-फ़रावान-ए-तमन्ना

फ़ानी बदायुनी