Love Poetry (page 140)

कुछ बस ही न था वर्ना ये इल्ज़ाम न लेते

फ़ानी बदायुनी

कूचा-ए-जानाँ में जा निकले जो ग़िल्माँ भूल कर

फ़ानी बदायुनी

किसी के एक इशारे में किस को क्या न मिला

फ़ानी बदायुनी

की वफ़ा यार से एक एक जफ़ा के बदले

फ़ानी बदायुनी

ख़ुशी से रंज का बदला यहाँ नहीं मिलता

फ़ानी बदायुनी

ख़ुदा असर से बचाए इस आस्ताने को

फ़ानी बदायुनी

ख़ुद मसीहा ख़ुद ही क़ातिल हैं तो वो भी क्या करें

फ़ानी बदायुनी

ख़ल्क़ कहती है जिसे दिल तिरे दीवाने का

फ़ानी बदायुनी

जुस्तुजू-ए-नशात-ए-मुबहम क्या

फ़ानी बदायुनी

जी ढूँढता है घर कोई दोनों जहाँ से दूर

फ़ानी बदायुनी

जज़्ब-ए-दिल जब ब-रू-ए-कार आया

फ़ानी बदायुनी

जल्वा-ए-इश्क़ हक़ीक़त थी हुस्न-ए-मजाज़ बहाना था

फ़ानी बदायुनी

जब दिल में तिरे ग़म ने हसरत की बना डाली

फ़ानी बदायुनी

इश्क़ इश्क़ हो शायद हुस्न में फ़ना हो कर

फ़ानी बदायुनी

इब्तिदा-ए-इश्क़ है लुत्फ़-ए-शबाब आने को है

फ़ानी बदायुनी

हम मौत भी आए तो मसरूर नहीं होते

फ़ानी बदायुनी

हो काश वफ़ा वादा-ए-फ़र्दा-ए-क़यामत

फ़ानी बदायुनी

हासिल-ए-इल्म-ए-बशर जहल का इरफ़ाँ होना

फ़ानी बदायुनी

हर तबस्सुम को चमन में गिर्या-सामाँ देख कर

फ़ानी बदायुनी

हर साँस के साथ जा रहा हूँ

फ़ानी बदायुनी

हर घड़ी इंक़लाब में गुज़री

फ़ानी बदायुनी

गुज़र गया इंतिज़ार हद से ये वादा-ए-ना-तमाम कब तक

फ़ानी बदायुनी

दुनिया-ए-हुस्न-ओ-इश्क़ में किस का ज़ुहूर था

फ़ानी बदायुनी

दुनिया मेरी बला जाने महँगी है या सस्ती है

फ़ानी बदायुनी

दिल की तरफ़ हिजाब-ए-तकल्लुफ़ उठा के देख

फ़ानी बदायुनी

दिल की काया ग़म ने वो पल्टी कि तुझ सा बन गया

फ़ानी बदायुनी

दिल की हर लर्ज़िश-ए-मुज़्तर पे नज़र रखते हैं

फ़ानी बदायुनी

दिल और दिल में याद किसी ख़ुश-ख़िराम की

फ़ानी बदायुनी

दैर में या हरम में गुज़रेगी

फ़ानी बदायुनी

बिजलियाँ टूट पड़ीं जब वो मुक़ाबिल से उठा

फ़ानी बदायुनी