Love Poetry (page 141)
बे-ज़ौक़-ए-नज़र बज़्म-ए-तमाशा न रहेगी
फ़ानी बदायुनी
बे-ख़ुदी पे था 'फ़ानी' कुछ न इख़्तियार अपना
फ़ानी बदायुनी
बेदाद के ख़ूगर थे फ़रियाद तो क्या करते
फ़ानी बदायुनी
बे-अजल काम न अपना किसी उनवाँ निकला
फ़ानी बदायुनी
अपनी जन्नत मुझे दिखला न सका तू वाइज़
फ़ानी बदायुनी
ऐ मौत तुझ पे उम्र-ए-अबद का मदार है
फ़ानी बदायुनी
ऐ बे-ख़ुदी ठहर कि बहुत दिन गुज़र गए
फ़ानी बदायुनी
ऐ अजल ऐ जान-ए-'फ़ानी' तू ने ये क्या कर दिया
फ़ानी बदायुनी
अदा से आड़ में ख़ंजर के मुँह छुपाए हुए
फ़ानी बदायुनी
अब उन्हें अपनी अदाओं से हिजाब आता है
फ़ानी बदायुनी
आह से या आह की तासीर से
फ़ानी बदायुनी
आह अब तक तो बे-असर न हुई
फ़ानी बदायुनी
ज़िंदगी नाम है इक जोहद-ए-मुसलसल का 'फ़ना'
फ़ना निज़ामी कानपुरी
तू फूल की मानिंद न शबनम की तरह आ
फ़ना निज़ामी कानपुरी
तू कुछ तो मिरे ज़ब्त-ए-मोहब्बत का सिला दे
फ़ना निज़ामी कानपुरी
मैं चला आया तिरा हुस्न-ए-तग़ाफ़ुल ले कर
फ़ना निज़ामी कानपुरी
कुछ दर्द की शिद्दत है कुछ पास-ए-मोहब्बत है
फ़ना निज़ामी कानपुरी
कोई पाबंद-ए-मोहब्बत ही बता सकता है
फ़ना निज़ामी कानपुरी
यूँ तिरी तलाश में तेरे ख़स्ता-जाँ चले
फ़ना निज़ामी कानपुरी
यूँ इंतिक़ाम तुझ से फ़स्ल-ए-बहार लेंगे
फ़ना निज़ामी कानपुरी
या रब मिरी हयात से ग़म का असर न जाए
फ़ना निज़ामी कानपुरी
वो ख़ानुमाँ-ख़राब न क्यूँ दर-ब-दर फिरे
फ़ना निज़ामी कानपुरी
तू फूल की मानिंद न शबनम की तरह आ
फ़ना निज़ामी कानपुरी
साक़िया तू ने मिरे ज़र्फ़ को समझा क्या है
फ़ना निज़ामी कानपुरी
मुझे प्यार से तिरा देखना मुझे छुप छुपा के वो देखना
फ़ना निज़ामी कानपुरी
हुस्न का एक आह ने चेहरा निढाल कर दिया
फ़ना निज़ामी कानपुरी
हम आगही-ए-इश्क़ का अफ़्साना कहेंगे
फ़ना निज़ामी कानपुरी
घर हुआ गुलशन हुआ सहरा हुआ
फ़ना निज़ामी कानपुरी
दुनिया-ए-तसव्वुर हम आबाद नहीं करते
फ़ना निज़ामी कानपुरी
दिल से अगर कभी तिरा अरमान जाएगा
फ़ना निज़ामी कानपुरी