Love Poetry (page 318)

दिल बहलने के वसीले दे गया वो

अख़तर शाहजहाँपुरी

अगर बुलंदी का मेरी वो ए'तिराफ़ करे

अख़तर शाहजहाँपुरी

मुद्दतों जो रहे बहारों में

अख्तर सईदी

इक अजब आलम है दिल का ज़िंदगी की राह में

अख्तर सईदी

ज़िंदगी क्या हुए वो अपने ज़माने वाले

अख़्तर सईद ख़ान

ज़िंदगी छीन ले बख़्शी हुई दौलत अपनी

अख़्तर सईद ख़ान

ज़माना इश्क़ के मारों को मात क्या देगा

अख़्तर सईद ख़ान

ये बे-सबब नहीं आए हैं आँख में आँसू

अख़्तर सईद ख़ान

तू कहानी ही के पर्दे में भली लगती है

अख़्तर सईद ख़ान

मुझे अब देखती है ज़िंदगी यूँ बे-नियाज़ाना

अख़्तर सईद ख़ान

किस जुर्म-ए-आरज़ू की सज़ा है ये ज़िंदगी

अख़्तर सईद ख़ान

खुली आँखों नज़र आता नहीं कुछ

अख़्तर सईद ख़ान

बहुत क़रीब रही है ये ज़िंदगी हम से

अख़्तर सईद ख़ान

ज़िंदगी क्या हुए वो अपने ज़माने वाले

अख़्तर सईद ख़ान

ये हम से पूछते हो रंज-ए-इम्तिहाँ क्या है

अख़्तर सईद ख़ान

तुम से छुट कर ज़िंदगी का नक़्श-ए-पा मिलता नहीं

अख़्तर सईद ख़ान

तुम हो या छेड़ती है याद-ए-सहर कोई तो है

अख़्तर सईद ख़ान

तिरी जबीं पे मिरी सुब्ह का सितारा है

अख़्तर सईद ख़ान

सुन रहा हूँ बे-सदा नग़्मा जो मैं बा-चश्म-ए-तर

अख़्तर सईद ख़ान

सैर-गाह-ए-दुनिया का हासिल-ए-तमाशा क्या

अख़्तर सईद ख़ान

सफ़र ही शर्त-ए-सफ़र है तो ख़त्म क्या होगा

अख़्तर सईद ख़ान

निगाहें मुंतज़िर हैं किस की दिल को जुस्तुजू क्या है

अख़्तर सईद ख़ान

नैरंगी-ए-नशात-ए-तमन्ना अजीब है

अख़्तर सईद ख़ान

मुद्दत से लापता है ख़ुदा जाने क्या हुआ

अख़्तर सईद ख़ान

मआल-ए-गर्दिश-ए-लैल-ओ-नहार कुछ भी नहीं

अख़्तर सईद ख़ान

कैसे समझाऊँ नसीम-ए-सुब्ह तुझ को क्या हूँ मैं

अख़्तर सईद ख़ान

कहें किस से हमारा खो गया क्या

अख़्तर सईद ख़ान

कभी ज़बाँ पे न आया कि आरज़ू क्या है

अख़्तर सईद ख़ान

दिल-ए-शोरीदा की वहशत नहीं देखी जाती

अख़्तर सईद ख़ान

दिल की राहें ढूँडने जब हम चले

अख़्तर सईद ख़ान