Love Poetry (page 319)

दीदनी है ज़ख़्म-ए-दिल और आप से पर्दा भी क्या

अख़्तर सईद ख़ान

आज भी दश्त-ए-बला में नहर पर पहरा रहा

अख़्तर सईद ख़ान

वो हुस्न-ए-सब्ज़ जो उतरा नहीं है डाली पर

अख़्तर रज़ा सलीमी

फ़ुरात-ए-चश्म में इक आग सी लगाता हुआ

अख़्तर रज़ा सलीमी

बताएँ क्या कि कहाँ पर मकान होते थे

अख़्तर रज़ा सलीमी

तीसरी पाली

अख़्तर राही

तजस्सुस

अख़्तर राही

ये औरतें

अख़्तर पयामी

रिवायात की तख़्लीक़

अख़्तर पयामी

पर्दा-ए-ज़ंगारी

अख़्तर पयामी

लम्स-ए-आख़िरी

अख़्तर पयामी

घरौंदे

अख़्तर पयामी

आवारा

अख़्तर पयामी

मैं मुंतज़िर हूँ तेरी तमन्ना लिए हुए

अख़्तर ओरेनवी

जुनूँ भी ज़हमत ख़िरद भी ल'अनत है ज़ख़्म-ए-दिल की दवा मोहब्बत

अख़्तर ओरेनवी

नश्तर से आरज़ू के दिल-ए-ज़िंदगी फ़िगार

अख़्तर ओरेनवी

मक़ाम-ए-दिल बहुत ऊँचा बना है

अख़्तर ओरेनवी

दारू-ए-होश-रुबा नर्गिस-ए-बीमार तो हो

अख़्तर ओरेनवी

सिलसिला ज़ख़्म ज़ख़्म जारी है

अख़्तर नज़्मी

लिखा है मुझ को भी लिखना पड़ा है

अख़्तर नज़्मी

अब नहीं लौट के आने वाला

अख़्तर नज़्मी

उस को भड़काऊ न दामन की हवाएँ दे कर

अख़तर मुस्लिमी

रह-ए-वफ़ा में लुटा कर मता-ए-क़ल्ब-ओ-जिगर

अख़तर मुस्लिमी

मुझ को मंज़ूर नहीं इश्क़ को रुस्वा करना

अख़तर मुस्लिमी

मिरे दिल पे हाथ रख कर मुझे देने वाले तस्कीं

अख़तर मुस्लिमी

लज़्ज़त-ए-दर्द मिली जुर्म-ए-मोहब्बत में उसे

अख़तर मुस्लिमी

ख़ुशी ही शर्त नहीं लुत्फ़-ए-ज़िंदगी के लिए

अख़तर मुस्लिमी

इक़रार-ए-मोहब्बत तो बड़ी बात है लेकिन

अख़तर मुस्लिमी

एक ही अंजाम है ऐ दोस्त हुस्न ओ इश्क़ का

अख़तर मुस्लिमी

दी उस ने मुझ को जुर्म-ए-मोहब्बत की वो सज़ा

अख़तर मुस्लिमी