Love Poetry (page 394)

बहुत मलूल बड़े शादमाँ गए हुए हैं

अब्दुल अहद साज़

बद-सोहबतों को छोड़ शरीफ़ों के साथ घूम

अब्दुल अहद साज़

बातिन से सदफ़ के दुर-ए-नायाब खुलेंगे

अब्दुल अहद साज़

अज़दवाजी ज़िंदगी भी और तिजारत भी अदब भी

अब्दुल अहद साज़

अबस है राज़ को पाने की जुस्तुजू क्या है

अब्दुल अहद साज़

आज फिर शब का हवाला तिरी जानिब ठहरे

अब्दुल अहद साज़

ये तो अब इश्क़ में जी लगने लगा है कुछ कुछ

अब्बास ताबिश

ये मोहब्बत की कहानी नहीं मरती लेकिन

अब्बास ताबिश

तिरी मोहब्बत में गुमरही का अजब नशा था

अब्बास ताबिश

न ख़्वाब ही से जगाया न इंतिज़ार किया

अब्बास ताबिश

मुझ से तो दिल भी मोहब्बत में नहीं ख़र्च हुआ

अब्बास ताबिश

मोहब्बत एक दम दुख का मुदावा कर नहीं देती

अब्बास ताबिश

मसरूफ़ हैं कुछ इतने कि हम कार-ए-मोहब्बत

अब्बास ताबिश

इश्क़ कर के भी खुल नहीं पाया

अब्बास ताबिश

इल्तिजाएँ कर के माँगी थी मोहब्बत की कसक

अब्बास ताबिश

हिज्र को हौसला और वस्ल को फ़ुर्सत दरकार

अब्बास ताबिश

इक मोहब्बत ही पे मौक़ूफ़ नहीं है 'ताबिश'

अब्बास ताबिश

दे इसे भी फ़रोग़-ए-हुस्न की भीक

अब्बास ताबिश

बस एक मोड़ मिरी ज़िंदगी में आया था

अब्बास ताबिश

बैठे रहने से तो लौ देते नहीं ये जिस्म ओ जाँ

अब्बास ताबिश

वो हँसती है तो उस के हाथ रोते हैं

अब्बास ताबिश

उसे मैं ने नहीं देखा

अब्बास ताबिश

परों में शाम ढलती है

अब्बास ताबिश

पागल

अब्बास ताबिश

अँदेशा-ए-विसाल की एक नज़्म

अब्बास ताबिश

अभी उस की ज़रूरत थी

अब्बास ताबिश

ये वाहिमे भी अजब बाम-ओ-दर बनाते हैं

अब्बास ताबिश

ये तो नहीं फ़रहाद से यारी नहीं रखते

अब्बास ताबिश

ये देख मिरे नक़्श-ए-कफ़-ए-पा मिरे आगे

अब्बास ताबिश

ये अजब साअत-ए-रुख़्सत है कि डर लगता है

अब्बास ताबिश