Sad Poetry (page 102)
मौज-ए-ख़ूँ सर से गुज़र जाती है हर रात मिरे
फ़ुज़ैल जाफ़री
मैं उजड़ा शहर था तपता था दश्त के मानिंद
फ़ुज़ैल जाफ़री
लफ़्ज़ों का साएबान बना लेने दीजिए
फ़ुज़ैल जाफ़री
ख़ून पलकों पे सर-ए-शाम जमेगा कैसे
फ़ुज़ैल जाफ़री
ख़ुद लफ़्ज़ पस-ए-लफ़्ज़ कभी देख सके भी
फ़ुज़ैल जाफ़री
कैसा मकान साया-ए-दीवार भी नहीं
फ़ुज़ैल जाफ़री
कैसा मकान साया-ए-दीवार भी नहीं
फ़ुज़ैल जाफ़री
है इबारत जो ग़म-ए-दिल से वो वहशत भी न थी
फ़ुज़ैल जाफ़री
गिर भी जाएँ तो न मिस्मार समझिए हम को
फ़ुज़ैल जाफ़री
दीवाने इतने जम्अ' हुए शहर बन गया
फ़ुज़ैल जाफ़री
दिलों के आइने धुँदले पड़े हैं
फ़ुज़ैल जाफ़री
दिल मुतमइन है हर्फ़-ए-वफ़ा के बग़ैर भी
फ़ुज़ैल जाफ़री
चुप रहे देख के उन आँखों के तेवर आशिक़
फ़ुज़ैल जाफ़री
चेहरे मकान राह के पत्थर बदल गए
फ़ुज़ैल जाफ़री
भूले-बिसरे हुए ग़म फिर उभर आते हैं कई
फ़ुज़ैल जाफ़री
आतिश-फ़िशाँ ज़बाँ ही नहीं थी बदन भी था
फ़ुज़ैल जाफ़री
आठों पहर लहू में नहाया करे कोई
फ़ुज़ैल जाफ़री
आख़िर चराग़-ए-दर्द-ए-मोहब्बत बुझा दिया
फ़ुज़ैल जाफ़री
कुत्तों का मुशाएरा
फ़ुर्क़त काकोरवी
फैमली-प्लैनिंग
फ़ुर्क़त काकोरवी
''बंगाल की रक़्क़ासा''
फ़ुर्क़त काकोरवी
ये जो दुश्मन ग़म-ए-निहानी है
फ्रांस गॉड्लिब क्वीन फ़्रेस्को
मेहनत-ओ-दर्द-ओ-रंज-ओ-ग़म और अलम ये रात दिन
फ्रांस गॉड्लिब क्वीन फ़्रेस्को
तमाम जिस्म की परतें जुदा जुदा करके
फ़िज़ा कौसरी
तुझे किस तरह छुड़ाऊँ ख़लिश-ए-ग़म-ए-निहाँ से
फ़िज़ा जालंधरी
ये नहीं कसरत-ए-आलाम से जल जाते हैं
फ़ितरत अंसारी
उन का मंशा है न फैले ख़स-ओ-ख़ाशाक में आग
फ़ितरत अंसारी
तसव्वुर में जमाल-ए-रू-ए-ताबाँ ले के चलता हूँ
फ़ितरत अंसारी
नए जहाँ में पुरानी शराब ले आए
फ़ितरत अंसारी
करम के नाम पे उन का इ'ताब चाहते हैं
फ़ितरत अंसारी