Sad Poetry (page 100)

अर्ज़-ए-नाज़-ए-शोख़ी-ए-दंदाँ बराए-ख़ंदा है

ग़ालिब

अजब नशात से जल्लाद के चले हैं हम आगे

ग़ालिब

अफ़्सोस कि दंदाँ का किया रिज़्क़ फ़लक ने

ग़ालिब

आमद-ए-सैलाब-ए-तूफ़ान-ए-सदा-ए-आब है

ग़ालिब

आमद-ए-ख़त से हुआ है सर्द जो बाज़ार-ए-दोस्त

ग़ालिब

आईना क्यूँ न दूँ कि तमाशा कहें जिसे

ग़ालिब

आईना देख अपना सा मुँह ले के रह गए

ग़ालिब

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक

ग़ालिब

आबरू क्या ख़ाक उस गुल की कि गुलशन में नहीं

ग़ालिब

आ कि मिरी जान को क़रार नहीं है

ग़ालिब

नहीं है टूटे की बूटी जहान में पैदा

जोर्ज पेश शोर

इसी ख़याल में दिन-रात मैं तड़पता हूँ

जोर्ज पेश शोर

ये फ़र्क़ जीते ही जी तक गदा-ओ-शाह में है

जोर्ज पेश शोर

रुके है आमद-ओ-शुद में नफ़स नहीं चलता

जोर्ज पेश शोर

नदी

गीताञ्जलि राय

मौत

गीताञ्जलि राय

किराया-दार

गीताञ्जलि राय

इतवार की दोपहर

गीताञ्जलि राय

इंतिज़ार-ए-दीद में यूँ आँख पथराई कि बस

ग़व्वास क़ुरैशी

दिल अगर माइल-ए-इ'ताब न हो

ग़व्वास क़ुरैशी

ज़िंदगी से उम्र-भर तक चलने का वादा किया

गौतम राजऋषि

वो टुकड़ा रात का बिखरा हुआ सा

गौतम राजऋषि

लम्हा गुज़र गया है कि अर्सा गुज़र गया

गौतम राजऋषि

इस बात को वैसे तो छुपाया न गया है

गौतम राजऋषि

साँप! आ काट मुझे

गौहर नौशाही

नाव न डूबी दरिया में

गौहर होशियारपुरी

लोग किनारे आन लगे

गौहर होशियारपुरी

ये सहरा-ए-तलब या बेशा-ए-आशुफ़्ता-हाली है

गौहर होशियारपुरी

यहाँ कौन इस के सिवा रह गया

गौहर होशियारपुरी

शाइरी बात नहीं गर्म-ए-सुख़न होने की

गौहर होशियारपुरी