Sad Poetry (page 103)

इंतिख़ाब-ए-निगह-ए-शौक़ को मुश्किल भी नहीं

फ़ितरत अंसारी

हुस्न-ए-फ़ितरत के अमीं क़ातिल-ए-किरदार न बन

फ़ितरत अंसारी

दामन-ए-हुस्न में हर अश्क-ए-तमन्ना रख दो

फ़ितरत अंसारी

तमाम उम्र जो हँसता ही रह गया यारो

फ़िरदौस गयावी

ये सच नहीं कि तमाज़त से डर गई है नदी

फ़िरदौस गयावी

वह ज़ुल्म-ओ-सितम ढाए और मुझ से वफ़ा माँगे

फ़िरदौस गयावी

फिर कभी ये ख़ता नहीं करना

फ़िरदौस गयावी

दोस्तों की अता है ख़ामोशी

फ़िरदौस गयावी

तमाम अजनबी चेहरे सजे हैं चारों तरफ़

फ़िराक़ जलालपुरी

बड़ा ग़ुरूर है पल भर की नेक-नामी का

फ़िराक़ जलालपुरी

अभी निकलो न घर से तंग आ के

फ़िराक़ जलालपुरी

ज़ब्त कीजे तो दिल है अँगारा

फ़िराक़ गोरखपुरी

ये ज़िंदगी के कड़े कोस याद आते हैं

फ़िराक़ गोरखपुरी

वो रातों-रात 'सिरी-कृष्ण' को उठाए हुए

फ़िराक़ गोरखपुरी

उसी की शरह है ये उठते दर्द का आलम

फ़िराक़ गोरखपुरी

तुझ को पा कर भी न कम हो सकी बे-ताबी-ए-दिल

फ़िराक़ गोरखपुरी

तू याद आया तिरे जौर-ओ-सितम लेकिन न याद आए

फ़िराक़ गोरखपुरी

तेरे आने की क्या उमीद मगर

फ़िराक़ गोरखपुरी

शाम भी थी धुआँ धुआँ हुस्न भी था उदास उदास

फ़िराक़ गोरखपुरी

रोने वाले हुए चुप हिज्र की दुनिया बदली

फ़िराक़ गोरखपुरी

न कोई वा'दा न कोई यक़ीं न कोई उमीद

फ़िराक़ गोरखपुरी

मौत का भी इलाज हो शायद

फ़िराक़ गोरखपुरी

मैं हूँ दिल है तन्हाई है

फ़िराक़ गोरखपुरी

मैं देर तक तुझे ख़ुद ही न रोकता लेकिन

फ़िराक़ गोरखपुरी

क्या जानिए मौत पहले क्या थी

फ़िराक़ गोरखपुरी

कुछ क़फ़स की तीलियों से छन रहा है नूर सा

फ़िराक़ गोरखपुरी

कोई आया न आएगा लेकिन

फ़िराक़ गोरखपुरी

किसी की बज़्म-ए-तरब में हयात बटती थी

फ़िराक़ गोरखपुरी

किस लिए कम नहीं है दर्द-ए-फ़िराक़

फ़िराक़ गोरखपुरी

ख़ुद मुझ को भी ता-देर ख़बर हो नहीं पाई

फ़िराक़ गोरखपुरी