Sad Poetry (page 104)
कम से कम मौत से ऐसी मुझे उम्मीद नहीं
फ़िराक़ गोरखपुरी
कहाँ का वस्ल तन्हाई ने शायद भेस बदला है
फ़िराक़ गोरखपुरी
जिस में हो याद भी तिरी शामिल
फ़िराक़ गोरखपुरी
इश्क़ फिर इश्क़ है जिस रूप में जिस भेस में हो
फ़िराक़ गोरखपुरी
इश्क़ अभी से तन्हा तन्हा
फ़िराक़ गोरखपुरी
इश्क़ अब भी है वो महरम-ए-बे-गाना-नुमा
फ़िराक़ गोरखपुरी
ग़रज़ कि काट दिए ज़िंदगी के दिन ऐ दोस्त
फ़िराक़ गोरखपुरी
'फ़िराक़' दौड़ गई रूह सी ज़माने में
फ़िराक़ गोरखपुरी
इक उम्र कट गई है तिरे इंतिज़ार में
फ़िराक़ गोरखपुरी
एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमें
फ़िराक़ गोरखपुरी
बहुत दिनों में मोहब्बत को ये हुआ मा'लूम
फ़िराक़ गोरखपुरी
असर भी ले रहा हूँ तेरी चुप का
फ़िराक़ गोरखपुरी
अब याद-ए-रफ़्तगाँ की भी हिम्मत नहीं रही
फ़िराक़ गोरखपुरी
अब तो उन की याद भी आती नहीं
फ़िराक़ गोरखपुरी
शाम-ए-अयादत
फ़िराक़ गोरखपुरी
परछाइयाँ
फ़िराक़ गोरखपुरी
जुगनू
फ़िराक़ गोरखपुरी
जुदाई
फ़िराक़ गोरखपुरी
हिण्डोला
फ़िराक़ गोरखपुरी
आज़ादी
फ़िराक़ गोरखपुरी
आधी रात
फ़िराक़ गोरखपुरी
ज़िंदगी दर्द की कहानी है
फ़िराक़ गोरखपुरी
ज़ेर-ओ-बम से साज़-ए-ख़िलक़त के जहाँ बनता गया
फ़िराक़ गोरखपुरी
ये नर्म नर्म हवा झिलमिला रहे हैं चराग़
फ़िराक़ गोरखपुरी
ये मौत-ओ-अदम कौन-ओ-मकाँ और ही कुछ है
फ़िराक़ गोरखपुरी
वो चुप-चाप आँसू बहाने की रातें
फ़िराक़ गोरखपुरी
वक़्त-ए-ग़ुरूब आज करामात हो गई
फ़िराक़ गोरखपुरी
तूर था का'बा था दिल था जल्वा-ज़ार-ए-यार था
फ़िराक़ गोरखपुरी
तुम्हें क्यूँकर बताएँ ज़िंदगी को क्या समझते हैं
फ़िराक़ गोरखपुरी
तेज़ एहसास-ए-ख़ुदी दरकार है
फ़िराक़ गोरखपुरी