Sad Poetry (page 64)
आप लोगों के कहे पर ही उखड़ जाते हैं
हैदर क़ुरैशी
न सर छुपाने को घर था न आब-ओ-दाना था
हैदर अली जाफ़री
मता-ए-दर्द का ख़ूगर मिरी तलाश में है
हैदर अली जाफ़री
इर्तिकाब-ए-जुर्म शर की बात है
हैदर अली जाफ़री
होता फ़नकार-ए-जदीद और न शाएर होता
हैदर अली जाफ़री
अस्र-ए-जदीद आया बड़ी धूम-धाम से
हैदर अली जाफ़री
उठ गई हैं सामने से कैसी कैसी सूरतें
हैदर अली आतिश
सिवाए रंज कुछ हासिल नहीं है इस ख़राबे में
हैदर अली आतिश
क़ैद-ए-मज़हब की गिरफ़्तारी से छुट जाता है
हैदर अली आतिश
न पूछ हाल मिरा चोब-ए-ख़ुश्क-ए-सहरा हूँ
हैदर अली आतिश
मैं वो ग़म-दोस्त हूँ जब कोई ताज़ा ग़म हुआ पैदा
हैदर अली आतिश
लगे मुँह भी चिढ़ाने देते देते गालियाँ साहब
हैदर अली आतिश
कुफ़्र ओ इस्लाम की कुछ क़ैद नहीं ऐ 'आतिश'
हैदर अली आतिश
किसी ने मोल न पूछा दिल-ए-शिकस्ता का
हैदर अली आतिश
किसी की महरम-ए-आब-ए-रवाँ की याद आई
हैदर अली आतिश
दोस्तों से इस क़दर सदमे उठाए जान पर
हैदर अली आतिश
आफ़त-ए-जाँ हुई उस रू-ए-किताबी की याद
हैदर अली आतिश
ये किस रश्क-ए-मसीहा का मकाँ है
हैदर अली आतिश
ये आरज़ू थी तुझे गुल के रू-ब-रू करते
हैदर अली आतिश
यार को मैं ने मुझे यार ने सोने न दिया
हैदर अली आतिश
वो नाज़नीं ये नज़ाकत में कुछ यगाना हुआ
हैदर अली आतिश
वहशी थे बू-ए-गुल की तरह इस जहाँ में हम
हैदर अली आतिश
वहशत-ए-दिल ने किया है वो बयाबाँ पैदा
हैदर अली आतिश
वही चितवन की ख़ूँ-ख़्वारी जो आगे थी सो अब भी है
हैदर अली आतिश
उन्नाब-ए-लब का अपने मज़ा कुछ न पूछिए
हैदर अली आतिश
तुर्रा उसे जो हुस्न-ए-दिल-आज़ार ने किया
हैदर अली आतिश
तोड़ कर तार-ए-निगह का सिलसिला जाता रहा
हैदर अली आतिश
तेरी जो याद ऐ दिल-ख़्वाह भूला
हैदर अली आतिश
ताज़ा हो दिमाग़ अपना तमन्ना है तो ये है
हैदर अली आतिश
तार-तार-ए-पैरहन में भर गई है बू-ए-दोस्त
हैदर अली आतिश