Sad Poetry (page 83)
हमारा नाम पुकारे हमारे घर आए
गुलनार आफ़रीन
दिल ने इक आह भरी आँख में आँसू आए
गुलनार आफ़रीन
आँसू भी वही कर्ब के साए भी वही हैं
गुलनार आफ़रीन
शब-ए-हिज्र में एक दिन देखना
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
इश्क़ में ख़ूब नीं बहुत रोना
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
इश्क़ में दर्द से है हुर्मत-ए-दिल
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
है अफ़्सोस ऐ उम्र जाने का तेरे
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
उम्र गई उल्फ़त-ए-ज़र जी से इलाही न गई
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
मुझ से मुड़ने की नीं किसी रू से
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
महज़ूँ न हो 'हुज़ूर' अब आता है यार अपना
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
जो यूँ आप बैरून-ए-दर जाएँगे
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
जहाँ में कहाँ बाहम उल्फ़त रही है
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
जब से गया है वो मिरा ईमान-ए-ज़िंदगी
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
गुल-एज़ार और भी यूँ रखते हैं रंग और नमक
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
ग़ैर आए पीछे पा गए मुजरे का बार पहले
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
दिल ब-अज़-काबा है याराँ जुब्बा-साई चाहिए
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
आइना है ये जहाँ इस में जमाल अपना है
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
मौज-ए-सरसर की तरह दिल से गुज़र जाओगे
गुलाम जीलानी असग़र
कितने दरिया इस नगर से बह गए
गुलाम जीलानी असग़र
अब के बाज़ार में ये तुर्फ़ा तमाशा देखा
गुलाम जीलानी असग़र
जफ़ा-ए-दिल-शिकन
ग़ुलाम दस्तगीर मुबीन
वरक़ वरक़ जो ज़माने के शाहकार में था
गुहर खैराबादी
वक़ार दे के कभी बे-वक़ार मत करना
गुहर खैराबादी
तोड़ कर शीशा-ए-दिल को मिरे बर्बाद न कर
गुहर खैराबादी
तारीकियों में अपनी ज़िया छोड़ जाऊँगा
गुहर खैराबादी
मैं ग़र्क़ वहाँ प्यास के पैकर की तरह था
गुहर खैराबादी
मैं इक मुसाफ़ि-ए-तन्हा मिरा सफ़र तन्हा
गुहर खैराबादी
जिस तरफ़ भी देखिए साया नहीं
गुहर खैराबादी
ग़म नहीं जो लुट गए हम आ के मंज़िल के क़रीब
गुहर खैराबादी
दिल के दामन में जो सरमाया-ए-अफ़्कार न था
गुहर खैराबादी