Sad Poetry (page 81)

मैं चुप कराता हूँ हर शब उमडती बारिश को

गुलज़ार

कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़

गुलज़ार

हम ने अक्सर तुम्हारी राहों में

गुलज़ार

एक सन्नाटा दबे-पाँव गया हो जैसे

गुलज़ार

अपने साए से चौंक जाते हैं

गुलज़ार

वो जो शाएर था

गुलज़ार

तआक़ुब

गुलज़ार

स्केच

गुलज़ार

शफ़क़

गुलज़ार

लैंडस्केप

गुलज़ार

ख़ुदा

गुलज़ार

हिरासत

गुलज़ार

एक दौर

गुलज़ार

एक और रात

गुलज़ार

दिल में ऐसे ठहर गए हैं ग़म

गुलज़ार

डाइरी

गुलज़ार

धूप लगे आकाश पे जब

गुलज़ार

देखो आहिस्ता चलो

गुलज़ार

अकेले

गुलज़ार

ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा

गुलज़ार

ज़िक्र होता है जहाँ भी मिरे अफ़्साने का

गुलज़ार

तिनका तिनका काँटे तोड़े सारी रात कटाई की

गुलज़ार

शाम से आज साँस भारी है

गुलज़ार

सब्र हर बार इख़्तियार किया

गुलज़ार

रुके रुके से क़दम रुक के बार बार चले

गुलज़ार

फूल ने टहनी से उड़ने की कोशिश की

गुलज़ार

ओस पड़ी थी रात बहुत और कोहरा था गर्माइश पर

गुलज़ार

मुझे अँधेरे में बे-शक बिठा दिया होता

गुलज़ार

कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है

गुलज़ार

कोई अटका हुआ है पल शायद

गुलज़ार