Sad Poetry (page 85)

आप जब चेहरा बदल कर आ गए

गोविन्द गुलशन

तड़प तो आज भी कुछ कम नहीं है

गोर बचन सिंह दयाल मग़मूम

मिरी आह-ओ-फ़ुग़ाँ कुछ भी नहीं है

गोर बचन सिंह दयाल मग़मूम

जब मिली उन से नज़र मिटने का सामाँ हो गया

गोर बचन सिंह दयाल मग़मूम

गिला क्या करूँ ऐ फ़लक बता मिरे हक़ में जब ये जहाँ नहीं

गोर बचन सिंह दयाल मग़मूम

बहुत वाक़िफ़ हैं लब-ए-आह-ओ-फ़ुग़ाँ से

गोर बचन सिंह दयाल मग़मूम

बात कुछ भी न थी फ़साना हुआ

गोर बचन सिंह दयाल मग़मूम

जब चले जाएँगे हम लौट के सावन की तरह

गोपालदास नीरज

अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए

गोपालदास नीरज

मेरा साक़ी है बड़ा दरिया-दिल

गोपाल मित्तल

ख़ुदा गवाह कि दोनों हैं दुश्मन-ए-परवाज़

गोपाल मित्तल

फ़ितरत में आदमी की है मुबहम सा एक ख़ौफ़

गोपाल मित्तल

नज़्म

गोपाल मित्तल

नज़्म

गोपाल मित्तल

नज़्म

गोपाल मित्तल

एक नज़्म

गोपाल मित्तल

तेरी आँखों में जो नशा है पज़ीराई का

गोपाल मित्तल

तेरा ख़ुलूस-ए-दिल तो महल्ल-ए-नज़र नहीं

गोपाल मित्तल

स्वाँग अब तर्क-ए-मोहब्बत का रचाया जाए

गोपाल मित्तल

रंगीनी-ए-हवस का वफ़ा नाम रख दिया

गोपाल मित्तल

मुझ पे तू मेहरबान है प्यारे

गोपाल मित्तल

मसरफ़ के बग़ैर जल रहा हूँ

गोपाल मित्तल

किस को है हुस्न-ए-ख़ुदा-दाद का दावा देखें

गोपाल मित्तल

कज-कुलाही की अदा याद आई

गोपाल मित्तल

जो शुआ-ए-लब है मौज-ए-नौ-बहार-ए-नग़्मा है

गोपाल मित्तल

इश्क़ में कब ये ज़रूरी है कि रोया जाए

गोपाल मित्तल

इश्क़ फ़ानी न हुस्न फ़ानी है

गोपाल मित्तल

अपने अंजाम से डरता हूँ मैं

गोपाल मित्तल

अगरचे बे-हिसी-ए-दिल मुझे गवारा नहीं

गोपाल मित्तल

यास की बदली यूँ दिल पर छा गई

गोपाल कृष्णा शफ़क़