Social Poetry (page 5)

महफ़िल में अब के आओ तो ऐसी ख़ता न हो

फ़रहत एहसास

जिस्म जब महव-ए-सुख़न हों शब-ए-ख़ामोशी से

फ़रहत एहसास

झगड़े ख़ुदा से हो गए अहद-ए-शबाब में

फ़रहत एहसास

हुई इक ख़्वाब से शादी मिरी तन्हाई की

फ़रहत एहसास

एक ग़ज़ल कहते हैं इक कैफ़िय्यत तारी कर लेते हैं

फ़रहत एहसास

शहर-दर-शहर दीदा-वर भटके

फ़रहत अब्बास

ख़याल आतिशीं ख़्वाबीदा सूरतें दी हैं

फ़रहत अब्बास

मिरे चराग़ो मिरा गंज-ए-बे-कराँ ले लो

फ़रहान सालिम

मैं तिरे संग कैसे चलूँ हम-सफ़र तू समुंदर है मैं साहिलों की हवा

फ़रहान सालिम

शौक़ का सिलसिला बे-कराँ है

फ़रीद जावेद

हमारे तन पे कोई क़ीमती क़बा न सही

फ़राग़ रोहवी

लबों के सामने ख़ाली गिलास रखते हैं

फ़राग़ रोहवी

चेहरे से कब अयाँ है मिरे इज़्तिरार भी

फख़्र अब्बास

वो जितने दूर हैं उतने ही मेरे पास भी हैं

फ़ैज़ुल हसन

गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ज़िंदगी

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तिरे ग़म को जाँ की तलाश थी तिरे जाँ-निसार चले गए

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

किसी ने कैसे ख़ज़ाने में रख लिया है मुझे

फ़ैसल अजमी

जब सजीले ख़िराम करते हैं

फ़ाएज़ देहलवी

लहू ने क्या तिरे ख़ंजर को दिलकशी दी है

एज़ाज़ अफ़ज़ल

गुज़र रहा हूँ मैं सौदा-गरों की बस्ती से

एजाज़ रहमानी

हँसी लबों पे सजाए उदास रहता है

एजाज़ रहमानी

मेरी मौत के मसीहा!

एजाज़ अहमद एजाज़

डर डर के जिसे मैं सुन रहा हूँ

एहतिशाम हुसैन

कभी कभी जो वो ग़ुर्बत-कदे में आए हैं

एहसान दानिश

शदीद गरमी के मौसम में मुशाइरा

दिलावर फ़िगार

अहमक़ों की कांफ्रेंस

दिलावर फ़िगार

मैं ने कहा कि शहर के हक़ में दुआ करो

दिलावर फ़िगार

मायूस-ए-अज़ल हूँ ये माना नाकाम-ए-तमन्ना रहना है

दिल शाहजहाँपुरी