Heart Broken Poetry (page 246)

अगर ख़ुशी में तुझे गुनगुनाते लगते हैं

अशफ़ाक़ नासिर

टूटे हुए लोग हैं सलामत

अशफ़ाक़ हुसैन

दिन भर के झमेलों से बचा लाया था ख़ुद को

अशफ़ाक़ हुसैन

बहुत छोटा सा दिल और इस में इक छोटी सी ख़्वाहिश

अशफ़ाक़ हुसैन

ज़रा ज़रा ही सही आश्ना तो मैं भी हूँ

अशफ़ाक़ हुसैन

फिर याद उसे करने की फ़ुर्सत निकल आई

अशफ़ाक़ हुसैन

कहा किस ने मुसलसल काम करने के लिए है

अशफ़ाक़ हुसैन

इतना बे-नफ़अ नहीं उस से बिछड़ना मेरा

अशफ़ाक़ हुसैन

हंगाम-ए-शब-ओ-रोज़ में उलझा हुआ क्यूँ हूँ

अशफ़ाक़ हुसैन

दिल इक नई दुनिया-ए-मआनी से मिला है

अशफ़ाक़ हुसैन

दिल अजनबी देस में लगा है

अशफ़ाक़ हुसैन

अब ए'तिबार पे जी चाहता तो है लेकिन

अशफ़ाक़ आमिर

लगा हो दिल तो ख़यालात कब बदलते हैं

अशफ़ाक़ आमिर

एक नया वाक़िआ इश्क़ में क्या हो गया

अशफ़ाक़ आमिर

तुम भी थे सरशार मैं भी ग़र्क-ए-बहर-ए-रंग-ओ-बू

अशअर नजमी

तेरे बदन की धूप से महरूम कब हुआ

अशअर नजमी

सरों के बोझ को शानों पे रखना मोजज़ा भी है

अशअर नजमी

रस्ते फ़रार के सभी मसदूद तो न थे

अशअर नजमी

न जाने कब कोई आ कर मिरी तकमील कर जाए

अशअर नजमी

कैनवस पर है ये किस का पैकर-ए-हर्फ़-ओ-सदा

अशअर नजमी

यहाँ तो हर घड़ी कोह-ए-निदा की ज़द में रहते हैं

अशअर नजमी

तेरे बदन की धूप से महरूम कब हुआ

अशअर नजमी

सुकूत-ए-शब के हाथों सोंप कर वापस बुलाता है

अशअर नजमी

शायद मिरी निगाह में कोई शिगाफ़ था

अशअर नजमी

रफ़्ता रफ़्ता ख़त्म क़िस्सा हो गया होना ही था

अशअर नजमी

मेरे उस के दरमियाँ ये फ़ासला अपनी जगह है

अशअर नजमी

मसअला ये तो नहीं कि सिन-रसीदा कौन था

अशअर नजमी

इस सफ़र में नीम-जाँ मैं भी नहीं तू भी नहीं

अशअर नजमी

इंकिशाफ़-ए-ज़ात के आगे धुआँ है और बस

अशअर नजमी

हम तह-ए-दरिया तिलिस्मी बस्तियाँ गिनते रहे

अशअर नजमी