Hope Poetry (page 118)

हमेशा वाहिद-ए-यकता बयाँ से गुज़रा है

अज़हर हाश्मी

गर इक़्तिदार-ए-सुकूँ इक़्तिदार-ए-वहशत है

अज़हर हाश्मी

ये कच्चे सेब चबाने में इतने सहल नहीं

अज़हर फ़राग़

उस लब की ख़ामुशी के सबब टूटता हूँ मैं

अज़हर फ़राग़

तिरे ब'अद कोई भी ग़म असर नहीं कर सका

अज़हर फ़राग़

कोई सिलसिला नहीं जावेदाँ तिरे साथ भी तिरे बा'द भी

अज़हर फ़राग़

कोई भी शक्ल मिरे दिल में उतर सकती है

अज़हर फ़राग़

कमी है कौन सी घर में दिखाने लग गए हैं

अज़हर फ़राग़

दीवारें छोटी होती थीं लेकिन पर्दा होता था

अज़हर फ़राग़

भँवर से ये जो मुझे बादबान खींचता है

अज़हर फ़राग़

भँवर से ये जो मुझे बादबान खींचता है

अज़हर फ़राग़

कभी उस से दुआ की खेतियाँ सैराब करना

अज़हर अदीब

जो ज़िंदगी की माँग सजाते रहे सदा

अज़हर अदीब

कुछ अब के रस्म-ए-जहाँ के ख़िलाफ़ करना है

अज़हर अदीब

कल परदेस में याद आएगी ध्यान में रख

अज़हर अदीब

दर टूटने लगे कभी दीवार गिर पड़े

अज़हर अदीब

पंछियों की किसी क़तार के साथ

अज़हर अब्बास

मैं सोचता हूँ सबक़ मैं ने वो पढ़ा ही नहीं

अज़ीज़ परीहारी

वो शोख़ दिल-ओ-जाँ की तमन्ना तो न निकला

अज़ीम कुरेशी

सुरूर-ए-इश्क़ की मस्ती कहाँ है सब के लिए

अज़ीम कुरेशी

सहरा का कोई फूल मोअ'त्तर तो नहीं था

अज़ीम कुरेशी

रंग कहाँ है साया सा है

अज़ीम कुरेशी

हम दर्द के मारे ही गिराँ-जाँ हैं वगर्ना

अज़ीम मुर्तज़ा

ये और बात है कि मदावा-ए-ग़म न था

अज़ीम मुर्तज़ा

वही यकसानियत-ए-शाम-ओ-सहर है कि जो थी

अज़ीम मुर्तज़ा

तेरा ख़याल भी है वज़-ए-ग़म का पास भी है

अज़ीम मुर्तज़ा

तिरा ख़याल भी है वज़-ए-ग़म का पास भी है

अज़ीम मुर्तज़ा

नीम-शब आतिश-ए-फ़रियाद-ए-असीराँ रौशन

अज़ीम मुर्तज़ा

कुछ नक़्श तिरी याद के बाक़ी हैं अभी तक

अज़ीम मुर्तज़ा

कुछ भी हो मिरा हाल नुमायाँ तो नहीं है

अज़ीम मुर्तज़ा