Hope Poetry (page 44)

तुझ से उम्मीद क्या लगा बैठे

हबीब कैफ़ी

'हबीब' इस ज़िंदगी के पेच-ओ-ख़म से हम भी नालाँ हैं

हबीब हैदराबादी

हम अहल-ए-आरज़ू पे अजब वक़्त आ पड़ा

हबीब हैदराबादी

दिल-ए-तन्हा में अब एहसास-ए-महरूमी नहीं शायद

हबीब हैदराबादी

सब्र ऐ दिल कि ये हालत नहीं देखी जाती

हबीब अशअर देहलवी

ये कैफ़ कैफ़-ए-मोहब्बत है कोई क्या जाने

हबीब अशअर देहलवी

तौर बे-तौर हुए जाते हैं

हबीब अशअर देहलवी

पहलू में इक नई सी ख़लिश पा रहा हूँ मैं

हबीब अशअर देहलवी

जो मिरे दिल में आह हो के रही

हबीब अशअर देहलवी

रानाई-ए-बहार पे थे सब फ़रेफ़्ता

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

निगाह-ए-लुत्फ़ को उल्फ़त-शिआर समझे थे

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

न हो कुछ और तो वो दिल अता हो

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

मुझ को एहसास-ए-रंग-ओ-बू न हुआ

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

मेरे लिए जीने का सहारा है अभी तक

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

इज़हार-ए-ग़म किया था ब-उम्मीद-ए-इल्तिफ़ात

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

है नवेद-ए-बहार हर लब पर

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

फ़ैज़-ए-अय्याम-ए-बहार अहल-ए-क़फ़स क्या जानें

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

अपने दामन में एक तार नहीं

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

आफ़ियत की उम्मीद क्या कि अभी

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

ये ग़म नहीं है कि अब आह-ए-ना-रसा भी नहीं

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

वो दर्द-ए-इश्क़ जिस को हासिल-ए-ईमाँ भी कहते हैं

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

नवेद-ए-आमद-ए-फ़स्ल-ए-बहार भी तो नहीं

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

न बेताबी न आशुफ़्ता-सरी है

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

मुझ को दिमाग़-ए-शेवन-ओ-आह-ओ-फ़ुग़ाँ नहीं

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

कुछ भी दुश्वार नहीं अज़्म-ए-जवाँ के आगे

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

ख़िज़ाँ-नसीब की हसरत ब-रू-ए-कार न हो

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

जबीं-ए-नवाज़ किसी की फ़ुसूँ-गरी क्यूँ है

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

फ़ैज़ पहुँचे हैं जो बहारों से

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

इस तरह दर्द का तुम अपने मुदावा करना

हबीब आरवी

हैं धब्बे तेग़-ए-क़ातिल के जिसे धोने नहीं देते

हबीब आरवी