Love Poetry (page 237)
किश्त-ए-दिल वीराँ सही तुख़्म-ए-हवस बोया नहीं
असलम आज़ाद
कहीं पे क़ुर्ब की लज़्ज़त का इक़्तिबास नहीं
असलम आज़ाद
कहीं पे क़ुर्ब की लज़्ज़त का इक़्तिबास नहीं
असलम आज़ाद
जगमगाती ख़्वाहिशों का नूर फैला रात भर
असलम आज़ाद
हमारी याद उन्हें आ गई तो क्या होगा
असलम आज़ाद
आँखों से मैं ने चख लिया मौसम के ज़हर को
असलम आज़ाद
उड़ा है रफ़्ता रफ़्ता रंग तस्वीर-ए-मोहब्बत का
असलम अंसारी
ख़फ़ा न हो कि तिरा हुस्न ही कुछ ऐसा था
असलम अंसारी
एक नज़्म
असलम अंसारी
ऐ ज़मिस्ताँ की हवा तेज़ न चल
असलम अंसारी
वो रंग उड़े हैं कुछ अब के बरस बहारों के
असलम अंसारी
वो नख़्ल जो बार-वर हुए हैं
असलम अंसारी
मुझे तो ये भी फ़रेब-ए-हवास लगता है
असलम अंसारी
लरज़ लरज़ के दिल-ए-ना-तवाँ ठहर ही न जाए
असलम अंसारी
कुछ तो ग़म-ख़ाना-ए-हस्ती में उजाला होता
असलम अंसारी
ख़फ़ा न हो कि तिरा हुस्न ही कुछ ऐसा था
असलम अंसारी
हर शख़्स इस हुजूम में तन्हा दिखाई दे
असलम अंसारी
गुबार-ए-एहसास-ए-पेश-ओ-पस की अगर ये बारीक तह हटाएँ
असलम अंसारी
एक समुंदर एक किनारा एक सितारा काफ़ी है
असलम अंसारी
दर्स-ए-आदाब-ए-जुनूँ याद दिलाने वाले
असलम अंसारी
बुझी है आतिश-ए-रंग-ए-बहार आहिस्ता आहिस्ता
असलम अंसारी
अपनी सदा की गूँज ही तुझ को डरा न दे
असलम अंसारी
ऐन-मुमकिन है किसी तर्ज़-ए-अदा में आए
असलम अंसारी
ख़ुश्बू जैसी रात ने मेरा
आसिमा ताहिर
डूबने की न तैरने की ख़बर
आसिमा ताहिर
नज़्म
आसिमा ताहिर
ज़ख़्म खा के भी मुस्कुराते हैं
आसिमा ताहिर
ये सोचा ही नहीं था तिश्नगी में
आसिमा ताहिर
सदियों को बेहाल किया था
आसिमा ताहिर
किस के मातम में रो रही है रात
आसिमा ताहिर