Sad Poetry (page 200)

कुछ ज़िंदगी में इश्क़-ओ-वफ़ा का हुनर भी रख

अज़ीज़ अन्सारी

हम उस को भूल बैठे हैं अँधेरे हम पे तारी हैं

अज़ीज़ अन्सारी

घुट घुट कर मर जाना भी

अज़ीज़ अन्सारी

घर से बाहर निकल कर

अज़ीज़ अन्सारी

दुनिया के जंजाल न पूछ

अज़ीज़ अन्सारी

रात इक शख़्स बहुत याद आया

अज़ीज अहमद ख़ाँ शफ़क़

बहुत दिनों से इधर उस को याद भी न किया

अज़ीज अहमद ख़ाँ शफ़क़

यही नहीं कि नज़र को झुकाना पड़ता है

अज़ीज अहमद ख़ाँ शफ़क़

वक़्त जब राह की दीवार हुआ

अज़ीज अहमद ख़ाँ शफ़क़

ख़ाक ओ ख़ला का हिसार और मैं

अज़ीज अहमद ख़ाँ शफ़क़

जुनूँ-नवाज़ सफ़र का ख़याल क्यूँ आया

अज़ीज अहमद ख़ाँ शफ़क़

ज़मीं की ख़ाक तो अफ़्लाक से ज़ियादा है

अज़ीम हैदर सय्यद

सुकून-ए-दिल गया नज़रों से सब क़तारे गए

अज़ीम हैदर सय्यद

मआल-ए-दोस्ती कहिए हदीस-ए-मह-वशाँ कहिए

अज़हर सईद

हलाकत-ए-दिल-ए-नाशाद राएगाँ भी नहीं

अज़हर सईद

चारासाज़ो मिरा इलाज करो

अज़हर नवाज़

सिलसिला यूँ भी रवा रक्खा शनासाई का

अज़हर नवाज़

नींद पलकों पे यूँ रखी सी है

अज़हर नवाज़

न जाने शाम ने क्या कह दिया सवेरे से

अज़हर नवाज़

शहर गुम-सुम रास्ते सुनसान घर ख़ामोश हैं

अज़हर नक़वी

रह गया दीदा-ए-पुर-आब का सामाँ हो कर

अज़हर नक़वी

नहीं है पर कोई इम्कान हो भी सकता है

अज़हर नक़वी

कोई ऐसी बात है जिस के डर से बाहर रहते हैं

अज़हर नक़वी

किनारों से जुदा होता नहीं तुग़्यानियों का दुख

अज़हर नक़वी

गिर्या-ए-शब की शहादत के लिए जागते हैं

अज़हर नक़वी

गिर्दाब-ए-रेग-ए-जान से मौज-ए-सराब तक

अज़हर नक़वी

एक इक साँस में सदियों का सफ़र काटते हैं

अज़हर नक़वी

दिल कुछ देर मचलता है फिर यादों में यूँ खो जाता है

अज़हर नक़वी

दर-पेश नहीं नक़्ल-ए-मकानी कई दिन से

अज़हर नक़वी

चाक-ए-दामान-ए-क़बा दाग़-ए-जुनूँ-साज़ बहुत

अज़हर नक़वी