Sad Poetry (page 202)
इस रास्ते में जब कोई साया न पाएगा
अज़हर इनायती
इस हादसे को देख के आँखों में दर्द है
अज़हर इनायती
घर का रस्ता जो भूल जाता हूँ
अज़हर इनायती
ग़मों से यूँ वो फ़रार इख़्तियार करता था
अज़हर इनायती
फ़िक्र में हैं हमें बुझाने की
अज़हर इनायती
फ़न उड़ानों का जब ईजाद किया था मैं ने
अज़हर इनायती
बनाए ज़ेहन परिंदों की ये क़तार मिरा
अज़हर इनायती
अपने आँचल में छुपा कर मिरे आँसू ले जा
अज़हर इनायती
अभी बिछड़ा है वो कुछ रोज़ तो याद आएगा
अज़हर इनायती
ये कम नहीं के वही शाम का सितारा है
अज़हर हाश्मी
मिरे वजूद का मेहवर चमकता रहता है
अज़हर हाश्मी
ख़्वाबों का इंतिख़ाब बदलता दिखाई दे
अज़हर हाश्मी
कभी मधुर कभी मीठी ज़बाँ का शाइ'र हूँ
अज़हर हाश्मी
जो दौलत तरक़्क़ी-रसाई बहुत है
अज़हर हाश्मी
जफ़ाओं की नुमाइश है किसी से कुछ नहीं बोलें
अज़हर हाश्मी
हमेशा वाहिद-ए-यकता बयाँ से गुज़रा है
अज़हर हाश्मी
गुज़रे हुए लम्हात को अब ढूँड रहा हूँ
अज़हर हाश्मी
गर इक़्तिदार-ए-सुकूँ इक़्तिदार-ए-वहशत है
अज़हर हाश्मी
बस रंज की है दास्ताँ उन्वान हज़ारों
अज़हर हाश्मी
आज़ुर्दा निगाहों पे ये मंज़र नहीं उतरा
अज़हर हाश्मी
बता रहा है झटकना तिरी कलाई का
अज़हर फ़राग़
अच्छे-ख़ासे लोगों पर भी वक़्त इक ऐसा आ जाता है
अज़हर फ़राग़
तिरे ब'अद कोई भी ग़म असर नहीं कर सका
अज़हर फ़राग़
कमी है कौन सी घर में दिखाने लग गए हैं
अज़हर फ़राग़
कैसे दुनिया का जाएज़ा किया जाए
अज़हर फ़राग़
धूप में साया बने तन्हा खड़े होते हैं
अज़हर फ़राग़
सब बातें ला-हासिल ठहरीं सारे ज़िक्र फ़ुज़ूल गए
अज़हर अली
ज़रा सी देर तुझे आइना दिखाया है
अज़हर अदीब
उसे बाम-ए-पज़ीराई पे कैसे छोड़ दूँ अब
अज़हर अदीब
दश्त-ए-शब में पता ही नहीं चल सका
अज़हर अदीब