Sad Poetry (page 204)

ये और बात है कि मदावा-ए-ग़म न था

अज़ीम मुर्तज़ा

वही यकसानियत-ए-शाम-ओ-सहर है कि जो थी

अज़ीम मुर्तज़ा

तेरा ख़याल भी है वज़-ए-ग़म का पास भी है

अज़ीम मुर्तज़ा

तिरा ख़याल भी है वज़-ए-ग़म का पास भी है

अज़ीम मुर्तज़ा

नीम-शब आतिश-ए-फ़रियाद-ए-असीराँ रौशन

अज़ीम मुर्तज़ा

महरूमी के दुख और तन्हाई के रंज उठाए

अज़ीम मुर्तज़ा

लाई न सबा बू-ए-चमन अब के बरस भी

अज़ीम मुर्तज़ा

कुछ नक़्श तिरी याद के बाक़ी हैं अभी तक

अज़ीम मुर्तज़ा

कुछ भी हो मिरा हाल नुमायाँ तो नहीं है

अज़ीम मुर्तज़ा

जब से है वो रौनक़-ए-महफ़िल आँखों में

अज़ीम मुर्तज़ा

ग़म का ये सलीक़ा भी रह गया है अब हम तक

अज़ीम मुर्तज़ा

फ़ुग़ाँ से तर्क-ए-फ़ुग़ाँ तक हज़ार तिश्ना-लबी है

अज़ीम मुर्तज़ा

फ़ित्ना-सामाँ ही नहीं फ़ित्ना-ए-सामाँ निकले

अज़ीम मुर्तज़ा

अफ़्साना-ए-हयात-ए-परेशाँ के साथ साथ

अज़ीम मुर्तज़ा

रस्म-ए-अंदेशा से फ़ारिग़ हुए हम

आज़र तमन्ना

शबाब आया तड़पने और तड़पाने का वक़्त आया

अाज़म जलालाबादी

इस तरह फूँक मेरा गुलिस्तान-ए-आरज़ू

आज़म चिश्ती

दिल को रहीन-ए-लज़्ज़त-ए-दरमाँ न कर सके

आज़म चिश्ती

कभी नाकामियों का अपनी हम मातम नहीं करते

आज़ाद गुरदासपुरी

ये मैं था या मिरे अंदर का ख़ौफ़ था जिस ने

आज़ाद गुलाटी

यादों की महफ़िल में खो कर

आज़ाद गुलाटी

वक़्त का ये मोड़ कैसा है कि तुझ से मिल के भी

आज़ाद गुलाटी

उसे भी जाते हुए तुम ने मुझ से छीन लिया

आज़ाद गुलाटी

एक वो हैं कि जिन्हें अपनी ख़ुशी ले डूबी

आज़ाद गुलाटी

दश्त-ए-ज़ुल्मात में हम-राह मिरे

आज़ाद गुलाटी

आसमाँ एक सुलगता हुआ सहरा है जहाँ

आज़ाद गुलाटी

आज आईने में ख़ुद को देख कर याद आ गया

आज़ाद गुलाटी

वो रूह के गुम्बद में सदा बन के मिलेगा

आज़ाद गुलाटी

वो जो किसी का रूप धार कर आया था

आज़ाद गुलाटी

उम्र भर चलते रहे हम वक़्त की तलवार पर

आज़ाद गुलाटी