Sad Poetry (page 236)
उस का अंजाम भला हो कि बुरा हो कुछ हो
अरशद जमाल हश्मी
सपेदी रंग-ए-जहाँ में नहीं मिलाता हूँ
अरशद जमाल हश्मी
आँखों में ख़्वाब रख दिए ता'बीर छीन ली
अरशद जमाल हश्मी
याद दिलवाइए उन को जो कभी वादा-ए-वस्ल
अरशद अली ख़ान क़लक़
रुख़ तह-ए-ज़ुल्फ़ है और ज़ुल्फ़ परेशाँ सर पर
अरशद अली ख़ान क़लक़
कुफ्र-ओ-इस्लाम के झगड़ों से छुड़ाया सद-शुक्र
अरशद अली ख़ान क़लक़
कोताह उम्र हो गई और ये न कम हुई
अरशद अली ख़ान क़लक़
ख़त में लिक्खी है हक़ीक़त दश्त-गर्दी की अगर
अरशद अली ख़ान क़लक़
ख़फ़ा हो गालियाँ दो चाहे आने दो न आने दो
अरशद अली ख़ान क़लक़
गुल-गूँ तिरी गली रहे आशिक़ के ख़ून से
अरशद अली ख़ान क़लक़
घाट पर तलवार के नहलाईयो मय्यत मिरी
अरशद अली ख़ान क़लक़
चला है छोड़ के तन्हा किधर तसव्वुर-ए-यार
अरशद अली ख़ान क़लक़
बुत-परस्ती में भी भूली न मुझे याद-ए-ख़ुदा
अरशद अली ख़ान क़लक़
बा'द मेरे जो किया शाद किसी को तो कहा
अरशद अली ख़ान क़लक़
ये जी में आता है जल जल के हर ज़माँ नासेह
अरशद अली ख़ान क़लक़
ये बारीक उन की कमर हो गई
अरशद अली ख़ान क़लक़
यार के नर्गिस-ए-बीमार का बीमार रहा
अरशद अली ख़ान क़लक़
यगाना उन का बेगाना है बेगाना यगाना है
अरशद अली ख़ान क़लक़
वा'दा-ख़िलाफ़ कितने हैं ऐ रश्क-ए-माह आप
अरशद अली ख़ान क़लक़
था क़स्द-ए-क़त्ल-ए-ग़ैर मगर मैं तलब हुआ
अरशद अली ख़ान क़लक़
तासीर जज़्ब मस्तों की हर हर ग़ज़ल में है
अरशद अली ख़ान क़लक़
सोते हैं फैल फैल के सारे पलंग पर
अरशद अली ख़ान क़लक़
सितम वो तुम ने किए भूले हम गिला दिल का
अरशद अली ख़ान क़लक़
शरफ़ इंसान को कब ज़िल्ल-ए-हुमा देता है
अरशद अली ख़ान क़लक़
रोज़-ए-अव्वल से असीर ऐ दिल-ए-नाशाद हैं हम
अरशद अली ख़ान क़लक़
रग-ओ-पै में भरा है मेरे शोर उस की मोहब्बत का
अरशद अली ख़ान क़लक़
पिन्हाँ था ख़ुश-निगाहों की दीदार का मरज़
अरशद अली ख़ान क़लक़
परतव-ए-रुख़ का तिरे दिल में गुज़र रहता है
अरशद अली ख़ान क़लक़
परतव पड़ा जो आरिज़-ए-गुलगून-ए-यार का
अरशद अली ख़ान क़लक़
नहीं चमके ये हँसने में तुम्हारे दाँत अंजुम से
अरशद अली ख़ान क़लक़