Sad Poetry (page 234)

कारवाँ तीरा-शब में चलते हैं

अर्शी भोपाली

फ़लसफ़ी किस लिए इल्ज़ाम-ए-फ़ना देता है

अर्शी भोपाली

दर्द के साँचे में ढल कर रह गई

अर्शी भोपाली

आग़ाज़-ए-आशिक़ी का अल्लाह रे ज़माना

अर्शी भोपाली

वीराँ वीराँ बाम-ओ-दर मैं और मिरी तन्हाई

अरशदुल क़ादरी

हो इंतिज़ार किसी का मगर मिरी नज़रें

अरशद सिद्दीक़ी

वो जिस ने मेरे दिल ओ जाँ में दर्द बोया है

अरशद सिद्दीक़ी

क़ल्ब-ओ-नज़र का सुकूँ और कहाँ दोस्तो

अरशद सिद्दीक़ी

न पयाम चाहते हैं न कलाम चाहते हैं

अरशद सिद्दीक़ी

मयख़ाने पे छाई है अफ़्सुर्दा-शबी कब से

अरशद सिद्दीक़ी

फ़ज़ाएँ कैफ़-ए-बहाराँ से जब महकती हैं

अरशद सिद्दीक़ी

शाम ढलते ही दिल के आँगन से

अरशद नईम

मैं वुसअतों से बिछड़ के तन्हा न जी सकूँगा

अरशद नईम

जो बुझ गए थे चराग़ फिर से जला रहा है

अरशद नईम

तेशा-ए-कर्ब

अरशद मेराज

लहू के साथ तबीअत में सनसनाती फिरे

अरशद मलिक

हिसार-ए-ग़ैर में रहता है ये मकान-ए-वजूद

अरशद महमूद नाशाद

नए मौसम की बशारत हैं हम

अरशद महमूद नाशाद

मैं ख़ाक छानता हूँ आफ़्ताब देखता हूँ

अरशद महमूद नाशाद

हम जुनूँ पेशा कि रहते थे तिरी ज़ात में गुम

अरशद महमूद नाशाद

ज़मीं की कोख से पहले शजर निकालता है

अरशद महमूद अरशद

मैं ने उसी से हाथ मिलाया था और बस

अरशद महमूद अरशद

ख़ुदी के ज़ो'म में ऐसा वो मुब्तला हुआ है

अरशद महमूद अरशद

कहीं तो फेंक ही देंगे ये बार साँसों का

अरशद महमूद अरशद

जब मैं उस आदमी से दूर हुआ

अरशद लतीफ़

तिरे ख़याल से फिर आँख मेरी पुर-नम है

अरशद लतीफ़

सुरूर-ए-इश्क़ ने उल्फ़त से बाँध रक्खा है

अरशद लतीफ़

कोई नहीं है इंतिज़ार सुब्ह-ए-विसाल के सिवा

अरशद लतीफ़

जब मैं उस आदमी से दूर हुआ

अरशद लतीफ़

ये माना सैल-ए-अश्क-ए-ग़म नहीं कुछ कम मगर 'अरशद'

अरशद कमाल