Sad Poetry (page 262)

नक़्श पानी पे बना हो जैसे

अमीर क़ज़लबाश

नदी के पार उजाला दिखाई देता है

अमीर क़ज़लबाश

न पूछ मंज़र-ए-शाम-ओ-सहर पे क्या गुज़री

अमीर क़ज़लबाश

मेरी पहचान है क्या मेरा पता दे मुझ को

अमीर क़ज़लबाश

मिरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा

अमीर क़ज़लबाश

लोग बनते हैं होशियार बहुत

अमीर क़ज़लबाश

क्या ख़रीदोगे चार आने में

अमीर क़ज़लबाश

ख़ौफ़ बन कर ये ख़याल आता है अक्सर मुझ को

अमीर क़ज़लबाश

हर रहगुज़र में काहकशाँ छोड़ जाऊँगा

अमीर क़ज़लबाश

हर गाम हादसा है ठहर जाइए जनाब

अमीर क़ज़लबाश

हर एक हाथ में पत्थर दिखाई देता है

अमीर क़ज़लबाश

हाँ ये तौफ़ीक़ कभी मुझ को ख़ुदा देता था

अमीर क़ज़लबाश

फ़िक्र-ए-ग़ुर्बत है न अंदेशा-ए-तन्हाई है

अमीर क़ज़लबाश

इक परिंदा अभी उड़ान में है

अमीर क़ज़लबाश

दूर बैठा हुआ तन्हा सब से

अमीर क़ज़लबाश

दर्द का शहर कहीं कर्ब का सहरा होगा

अमीर क़ज़लबाश

चलो कि ख़ुद ही करें रू-नुमाइयाँ अपनी

अमीर क़ज़लबाश

बंद आँखों से वो मंज़र देखूँ

अमीर क़ज़लबाश

अपने हमराह ख़ुद चला करना

अमीर क़ज़लबाश

अगर मस्जिद से वाइज़ आ रहे हैं

अमीर क़ज़लबाश

ये कहूँगा ये कहूँगा ये अभी कहते हो

अमीर मीनाई

यार पहलू में है तन्हाई है कह दो निकले

अमीर मीनाई

वस्ल में ख़ाली हुई ग़ैर से महफ़िल तो क्या

अमीर मीनाई

क़रीब है यारो रोज़-ए-महशर छुपेगा कुश्तों का ख़ून क्यूँकर

अमीर मीनाई

पुतलियाँ तक भी तो फिर जाती हैं देखो दम-ए-नज़अ

अमीर मीनाई

फिर बैठे बैठे वादा-ए-वस्ल उस ने कर लिया

अमीर मीनाई

पहलू में मेरे दिल को न ऐ दर्द कर तलाश

अमीर मीनाई

नावक-ए-नाज़ से मुश्किल है बचाना दिल का

अमीर मीनाई

नब्ज़-ए-बीमार जो ऐ रश्क-ए-मसीहा देखी

अमीर मीनाई

मुश्किल बहुत पड़ेगी बराबर की चोट है

अमीर मीनाई