Sad Poetry (page 264)

हटाओ आइना उम्मीद-वार हम भी हैं

अमीर मीनाई

हँस के फ़रमाते हैं वो देख के हालत मेरी

अमीर मीनाई

हम-सर-ए-ज़ुल्फ़ क़द-ए-हूर-ए-शमाइल ठहरा

अमीर मीनाई

हैं न ज़िंदों में न मुर्दों में कमर के आशिक़

अमीर मीनाई

है ख़मोशी ज़ुल्म-ए-चर्ख़-ए-देव-पैकर का जवाब

अमीर मीनाई

गुज़र को है बहुत औक़ात थोड़ी

अमीर मीनाई

गले में हाथ थे शब उस परी से राहें थीं

अमीर मीनाई

दिल को तर्ज़-ए-निगह-ए-यार जताते आए

अमीर मीनाई

दिल जो सीने में ज़ार सा है कुछ

अमीर मीनाई

चुप भी हो बक रहा है क्या वाइज़

अमीर मीनाई

अमीर लाख इधर से उधर ज़माना हुआ

अमीर मीनाई

ऐ ज़ब्त देख इश्क़ की उन को ख़बर न हो

अमीर मीनाई

अच्छे ईसा हो मरीज़ों का ख़याल अच्छा है

अमीर मीनाई

शहर में सारे चराग़ों की ज़िया ख़ामोश है

अमीर इमाम

पहले सहरा से मुझे लाया समुंदर की तरफ़

अमीर इमाम

न आबशार न सहरा लगा सके क़ीमत

अमीर इमाम

धूप में कौन किसे याद किया करता है

अमीर इमाम

यूँ मिरे होने को मुझ पर आश्कार उस ने किया

अमीर इमाम

शहर में सारे चराग़ों की ज़िया ख़ामोश है

अमीर इमाम

कि जैसे कोई मुसाफ़िर वतन में लौट आए

अमीर इमाम

ख़ुद को हर आरज़ू के उस पार कर लिया है

अमीर इमाम

काँधों से ज़िंदगी को उतरने नहीं दिया

अमीर इमाम

कभी तो बनते हुए और कभी बिगड़ते हुए

अमीर इमाम

बन के साया ही सही सात तो होती होगी

अमीर इमाम

अब इस जहान-ए-बरहना का इस्तिआरा हुआ

अमीर इमाम

शाइ'र की दुनिया

अमीर औरंगाबादी

ख़त का इंतिज़ार

अमीर औरंगाबादी

तिरा ख़याल था लफ़्ज़ों में ढल गया कैसे

अमीर अहमद ख़ुसरव

कौन कहता है सर-ए-अर्श-ए-बरीं रहता है

अमीर अहमद ख़ुसरव

इस दौर से ख़ुलूस मोहब्बत वफ़ा न माँग

अमीर अहमद ख़ुसरव