Sad Poetry (page 263)

ख़ंजर चले किसी पे तड़पते हैं हम 'अमीर'

अमीर मीनाई

कौन उठाएगा तुम्हारी ये जफ़ा मेरे बाद

अमीर मीनाई

करता मैं दर्दमंद तबीबों से क्या रुजूअ

अमीर मीनाई

कहते हो कि हमदर्द किसी का नहीं सुनते

अमीर मीनाई

देख ले बुलबुल ओ परवाना की बेताबी को

अमीर मीनाई

छेड़ देखो मिरी मय्यत पे जो आए तो कहा

अमीर मीनाई

'अमीर' अब हिचकियाँ आने लगी हैं

अमीर मीनाई

अल्लाह-री नज़ाकत-ए-जानाँ कि शेर में

अमीर मीनाई

अल्लाह-रे सादगी नहीं इतनी उन्हें ख़बर

अमीर मीनाई

अभी कमसिन हैं ज़िदें भी हैं निराली उन की

अमीर मीनाई

वस्ल की शब भी ख़फ़ा वो बुत-ए-मग़रूर रहा

अमीर मीनाई

वादा-ए-वस्ल और वो कुछ बात है

अमीर मीनाई

तीर पर तीर लगाओ तुम्हें डर किस का है

अमीर मीनाई

तिरा क्या काम अब दिल में ग़म-ए-जानाना आता है

अमीर मीनाई

शमशीर है सिनाँ है किसे दूँ किसे न दूँ

अमीर मीनाई

सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता

अमीर मीनाई

साफ़ कहते हो मगर कुछ नहीं खुलता कहना

अमीर मीनाई

क़िबला-ए-दिल काबा-ए-जाँ और है

अमीर मीनाई

पूछा न जाएगा जो वतन से निकल गया

अमीर मीनाई

फूलों में अगर है बू तुम्हारी

अमीर मीनाई

न बेवफ़ाई का डर था न ग़म जुदाई का

अमीर मीनाई

मुझ मस्त को मय की बू बहुत है

अमीर मीनाई

मिरे बस में या तो या-रब वो सितम-शिआर होता

अमीर मीनाई

मैं रो के आह करूँगा जहाँ रहे न रहे

अमीर मीनाई

क्या रोके क़ज़ा के वार तावीज़

अमीर मीनाई

कुछ ख़ार ही नहीं मिरे दामन के यार हैं

अमीर मीनाई

कहा जो मैं ने कि यूसुफ़ को ये हिजाब न था

अमीर मीनाई

जब से बाँधा है तसव्वुर उस रुख़-ए-पुर-नूर का

अमीर मीनाई

हम जो मस्त-ए-शराब होते हैं

अमीर मीनाई

हुआ जो पैवंद मैं ज़मीं का तो दिल हुआ शाद मुझ हज़ीं का

अमीर मीनाई